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राममंदिर पर कांग्रेस का तंज, ''PM के बयान से साफ है कि वो भागवत की नहीं सुनते''

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

राम के नाम पर छिड़ा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. अयोध्या में राम जन्म भूमि पर राम मंदिर बनाने को लेकर देश के हर महकमे में हलचल बढ़ती जा रही है. इस बीच कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा वार किया है.

राम मंदिर मामले में अध्यादेश से जुड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को कटाक्ष किया और कहा कि ये बात साफ हो गयी है कि मोदी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की बात नहीं मानते हैं.

कांग्रेस पार्टी ने ये भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपनी टिप्पणी से अयोध्या मामले को लेकर लोगों को भ्रमित करने का कोशिश किया है.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'हमारा ये मानना है कि राम मंदिर मुद्दे पर जो निर्णय न्यायालय से आएगा, वह सब पक्षों को मानना चाहिए और सरकार को उसको लागू करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए. लेकिन मोदी जी ने ये कहकर तो उसको भी पचड़े में डाल दिया कि निर्णय के बाद भी अध्यादेश लाएंगे.' 

उन्होंने कहा, 'इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने RSS और भारतीय जनता पार्टी की मांग को खारिज कर दिया.' 

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ' एक बात और साफ हो गई कि न वो मोहन भागवत जी की बात मानते हैं और न बीजेपी नेताओं की और न किसी और व्यक्ति विशेष की. मुझे उम्मीद है कि उनकी पार्टी के लोगों को अब ये बात समझ आ गई होगी." 

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूज़ एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू साक्षात्कार में कहा कि राम मंदिर को लेकर जब तक कानूनी प्रक्रिया चल रही है तब तक अध्यादेश लाने का विचार नहीं है.

उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस के वकील सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मुद्दे पर सुनवाई में बाधा पैदा कर रहे हैं.

पीएम ने कहा, "न्यायिक प्रक्रिया समाप्त होने दें. न्यायिक प्रक्रिया समाप्त होने के बाद, सरकार के रूप में हमारी जिम्मेदारी जो भी होगी, हम सभी प्रयास करने के लिए तैयार हैं."

इसे भी पढ़ें - राम मंदिर मुद्दे पर बोले PM मोदी- "कानूनी प्रक्रिया के बाद ही अध्यादेश लाने पर हो सकता है विचार"

प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद RSS ने कहा कि मोदी इस सरकार के कार्यकाल में ही मंदिर का वादा पूरा करें ऐसी भारत की जनता की अपेक्षा है.

बता दें, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 4 जनवरी को सुनवाई होनी है.

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