(File Photo | PTI)
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जब CJI रंजन गोगोई के पिता ने सिक्का उछालकर किया बेटों की किस्मत का फैसला...

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

बुधवार को देश को जस्टिस रंजन गोगोई के रूप में 46वां  CJI(Chief Justice of india) मिल गया है. राराष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 63 वर्षीय न्यायमूर्ति गोगोई को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में एक संक्षिप्त समारोह में शपथ दिलाई.   भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति गोगोई का कार्यकाल 13 माह से थोड़ा अधिक होगा और वह 17 नवंबर 2019 को सेवानिवृत्त होंगे. लेकिन अगर उसके जीवन पर नजर डाली जाए तो पाएंगे वह बहुत सादगी का जीवन जीने वाले व्यक्ति हैं. 

दरअसल उनके पिता केशब चंद्र गोगोई असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. लेकिन जब  जस्टिस गोगोई और उनके भाई स्कूल जाने की उम्र में दाखिल हुए तो केशब ने कहा कि दोनों भाइयों में से एक ही एडमिशान ले सकता है. जिसका फैसला करने के लिए केशब चंद्र गोगोई ने सिक्का उछाला और फैसला उनके बड़े भाई अंजन के पक्ष में आया जिसके बाद उनका दाखिला सेना स्कूल में हुआ और वो आगे जाकर एयर मार्शल बने. 

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अंग्रेजी अखबार द टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बड़े भाई के सेना स्कूल में जाने के बाद रंजन गोगोई को डिब्रूगढ़ के डॉन बॉस्को स्कूल में दाखिला मिला. स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद रंजन गोगोई ने दिल्ली का रूख किया और सेंट स्टीफेंस से इतिहास में डिग्री हासिल की. लेकिन अपनी पिता की इच्छा के अनुसार उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी की और उसमें उनको सफलता भी मिली. लेकिन जिस्टिस गोगोई का मन प्रशासनिक सेवा के बजाए न्यायिक क्षेत्र में जाने के था. उन्होंने अपनी इस इच्छा को अपने पिता के सामने रखा, पिता की मंजूरी मिलने के बाद गोगोई ने कानून की डिग्री हासिल कर न्यायिक क्षेत्र में अपना करियार शुरू किया. 


18 नवंबर 1954 को जन्मे गोगोई पांच भाई- बहनों में दूसरे नंबर पर आते हैं. 28 फरवरी 2001 में गुवाहटी हाईकोर्ट ने बतौर जज अपना करियर शुरू करने वाले जस्टिस गोगोई की 23, अप्रैल, 2012 को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति हुई थी और अब यानि बुधवार को वो मुख्य न्यायधीश बने हैं और 17 नवंबर, 2019 को रिटायर होंगे.. 

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