Law and Order

यूपी में शामली के बाद अब मेरठ में उछला 'पलायन' का मुद्दा, घर के आगे लगे बिकाऊ के बोर्ड

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

एक बार फिर उत्तर प्रदेश से कथित पलायन के मुद्दे को लेकर राजनीति गर्मा गई है। पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ प्रांत में कथित पलायन का मुद्दा के सामने आने से प्रशासन की नींद उड़ी पड़ी है। यहां प्रह्लाद नगर में असामाजिक तत्वों की गुंडागर्दी इतनी बढ़ गई है कि अब यहां के लोग अपने घर छोड़कर पलायन को मजबूर हो गए है। 

यहीं नहीं बात इतनी बढ़ गई है कि कुछ लोगों ने अपने मकानों पर बिकाऊ का बोर्ड लगा दिया है। इस मोहल्ले में रहने वाले लोगों का कहना है कि आए दिन यहां असामाजिक तत्व महिलाओं से छेड़खानी करते है। रात में यहां अक्सर फायरिंग होने की घटना हो रही है शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। जिसकी वजह से उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

एक समुदाय के लोग दूसरे समुदाय पर छेड़छाड़ और लूटपाट का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि यहां पर पलायन जैसी कोई बात नहीं है। ये मामला आपसी रंजिश का है। साथ ही पलायन के मामले को  सिटी मजिस्ट्रेट ने भी सिरे से नकार दिया है। वहीं मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जांच के बाद पूरे मामले की रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह ने कहा कि जो समाचार पत्रों में छापा उसके संदर्भ में हम लोगों और सीईओ साहब ने जांच की, लोगों से पूछा भी, लेकिन पलायन जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।  

देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए बहुसंख्यकों को प्रह्लाद नगर में बसाया गया था। प्रह्लाद नगर पंजाबी बाहुल्य इलाका है। इस मोहल्ले से इस्लामाबाद, पिल्लोखड़ी, श्यामनगर, गोलाकुआं समेत कई दूसरे अल्पसंख्यक मोहल्लों की सीमाएं मिलती है। इस लिहाज से इस इलाके को बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां करीब 125 परिवार मोहल्ला छोड़कर जाने को तैयार हैं।

एक तरफ जहां लोग पलायन का दर्द झेलने को तैयार हैं तो वहीं दूसरी तरफ इसपर सियासी रोटियां भी सेकी जा रही है। इस मामले में बीजेपी पार्षद जितेंद्र पाहवा का कहना है कि प्रह्लाद नगर सोसाइटी की मीटिंग में इस समस्या को उठाया गया लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकला। ऐसे में यहां रहने वाले लोगों के पास अब अपना घर छोड़ने  के अलावा और कोई दूसरा चारा नहीं बचा है।