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असिस्टेंट कमांडेंट जुनैद खान: मिलिए CRPF के इस 'मददगार' से, जिनके नेतत्व में हुआ बारामूला 'आतंक मुक्त'

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

देश आज भड़ी धूमधाम से 70वें गणतंत्र दिवस मना रहा है. इस मौके पर रिपब्लिक टीवी उन वीर सपूतों को नमन करने के लिए एक खास सीरीज  'प्राउड टू बी इंडियन' लेकर आया है.  जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में भारत को गौरवान्वित किया है , जिन्होंने  जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में भारत को गौरवान्वित किया है

देश को सर्वोपरि रखने वाले वो सैनिक जो अपनी जान की परवाह किए बगैर यह यह सुनिश्चित करते हैं कि भारत आंतरिक और बाहरी दोनों खतरों से सुरक्षित रहे. कुछ ऐसे जज्बे रखने वाले जुनैद खान की कहानी युवाओं के लिए प्ररेण का स्त्रोत बन सकती है. 

जुनैद खान जम्मू और कश्मीर के बारामूला जिले में सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट हैं, और ऑपरेशन 'मद्दागर' के प्रभारी हैं, जिसका उद्देश्य संकट से गुजर रहे राज्य के किसी भी व्यक्ति को पूर्ण सहायता प्रदान करना है.

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कश्मीर में रहने वाला कोई भी व्यक्ति 1411 डायल कर सकता है और वे इस ऑपरेशन से मदद ले सकते हैं. इस अभियान की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मदादगर हेल्पलाइन पर हर महीने 15000 से अधिक फोन कॉल आते हैं .

2016 में, अपने बैच में टॉप करने के बाद , जुनैद को तत्कालीन CRPF महानिदेशक के. दुर्गा प्रसाद द्वारा प्रतिष्ठित 'निर्देशक का बैटन' मिला, जबकि CRPF में भी उन्हें शामिल किया जा रहा था , जुनैद को 52 सप्ताह की गहन प्रशिक्षण प्रक्रिया के बाद CRPF में शामिल किया जा रहा था . 

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जुनैद का जन्म 1990 में बारामुला जिले के Pehlipora गाँव में हुआ था . 12 वीं पूरी करने के बाद , उन्होंने 2013 में UPSC परीक्षा देने का फैसला करने से पहले एक सरकारी कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया .

जुनैद और उनके साथी सीआरपीएफ के जवानों की ऐसी कोशिशों की वजह से बारामूला हाल ही में जम्मू-कश्मीर राज्य का पहला और एकमात्र ऐसा जिला बन गया है, जो 'चरमपंथ मुक्त' हो गया है . 
 

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