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श्रीलंका में विस्फोट करने वाले अल्लाह के दुश्मन और जमीन पर शैतान के प्रतीक : धर्मगुरु

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

श्रीलंका में ईस्टर के मौके पर सिलसिलेवार विस्फोटों के खिलाफ और हमले के पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए विभिन्न मुस्लिम और ईसाई धर्म गुरुओं ने इन विस्फोटों में लिप्त लोगों को ‘अल्लाह के दुश्मन’ और जमीन पर ‘शैतानी ताकतों के प्रतीक’ करार दिया । साथ ही कहा कि इनको किसी मजहब से जोड़ना अपनी आस्था का अपमान करना है।
 
विभिन्न धर्मों की नुमाइंदगी करने वाले धर्मगुरुओं की संयुक्त प्रेस वार्ता में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि हम पूरी तरह से ईसाई समुदाय के साथ खड़े हैं और इसमें शामिल लोगों को ऐसी सजा दी जाए जो मिसाल बनें।
 
सीबीसीआई के इंटरफेथ डायलॉग के प्रभारी फादर जॉबी ने कहा कि सभी धर्मों में कट्टरपंथी होते हैं, लेकिन इनकी संख्या थोड़ी सी होती है। कट्टरपंथ किसी भी धर्म में हो, उसका शिकार आम लोग होते हैं। इससे निपटने की जरूरत है। सभी धर्म दूसरों का ख्याल रखने की सीख देते हैं।
 
ऑल इंडिया क्रिश्चियन कौंसिल के पूर्व महासचिव डॉ जॉन दयाल ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि भारत के दो सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय (मुसलमान और ईसाई) श्रीलंका के लोगों के साथ खड़े हैं। 
 
उन्होंने कहा कि इस तरह का मशविरा आ रहा है कि ‘उच्च स्तरीय अंतरजातीय नागरिक प्रतिनिधिमंडल’ श्रीलंका जाएं और पीड़ित परिवारों से मिले और उनके साथ हमदर्दी पेश करें।
 
जमात-ए-इस्लामी हिंद के पूर्व नायब अमीर नुसरत अली ने कहा कि जो लोग मजहब के नाम पर ऐसा (आतंकी हमले) करते हैं। वह मजहब की ‘गलत परिकल्पना’ पेश करते हैं।
 
उन्होंने कहा, ‘‘ज़ालिम और जुल्म सहने वाले की पहचान धर्म के आधार पर नहीं हो सकती है।’’ 
 
दिल्ली की शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहसीन तकवी ने कहा कि कोई भी आतंकवाद अच्छा या बुरा नहीं होता है। यह दरिंगदगी है। कोई भी मजहब इसकी इजाजत नहीं देता है।’’ 
 
इन धर्मगुरुओं ने साझा बयान जारी कर कहा, ‘‘जो लोग इन विस्फोटों में लिप्त हैं वे मानव सभ्यता और खुदा के दुश्मन हैं और धरती पर शैतानी ताकतों के प्रतीक हैं। उन्हें किसी धर्म से जोड़ना खुद के धर्म और आस्था का अपमान करना है।’’ 
 
बयान में कहा गया है, ‘‘धार्मिक त्योहारों के मौके पर धार्मिक स्थलों पर हमले विभिन्न कौमों के बीच दुश्मनी पैदा करने के लिए होते है।’’ 
 
इस संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष डॉ जफर उल इस्लाम खान, ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस मुशावरत के अध्यक्ष नावेद हामिद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारूकी भी थे।
 
गौरतलब है कि ईस्टर के दिन रविवार को श्रीलंका के गिरजाघरों और लग्जरी होटलों में सिलसिलेवार विस्फोट हुए थे। इन विस्फोटों में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जिनमें 10 भारतीय भी शामिल हैं।
 
 
 

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