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UNSC में मसूद अजहर पर बैन नहीं, आतंक पर मेहरबान चीन ने फिर लगाया अडंगा

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

जैश सरगना मसूद अजहर के खिलाफ यूएनएससी में लाया गए प्रस्ताव पर रोक लग गई है। मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने रोक लगा दी है। चीन ने चालबाजी की और वीटो का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को रोक दिया।

प्रस्ताव के समर्थन में अमेरिका फ्रांस और ब्रिटेन के साथ दस देश थे लेकिन चीन के अड़ंगे की वजह से एक बार फिर प्रस्ताव पर रोक लग गई। भारत ने चीन के फैसले पर निराशा जताई है लेकिन साफ किया है कि आतंक और आतंकवादियों के खिलाफ जंग जारी रहेगी।

आतंक के मददगार चीन ने एक बार फिर चालाबाजी की है। चीन ने अपने वीटो का इस्तेमाल कर मसूद अजहर के खिलाफ प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया। चीन की काली करतूत से आतंक का सरगना एक बार फिर बच गया। मसूद अजहर ग्लोबल आतंकी घोषित नहीं हो पाया।

चीन के इस कारनामे से जाहिर है चीन न केवल पाकिस्तान का मददगार है बल्कि पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों को भी मददगार है। चीन की इस चालबाजी को पूरी दुनिया देख रही है। चीन किस तरह से आतंकियों को मदद कर रहा है ये आज पूरी दुनिया के सामने है।

दरअसल चीन भारत से सौदा करना चाह रहा था लेकिन जब सौदे में नाकाम हुआ तो चीन ने वीटो का इस्तेमाल कर आतंक के इस अजगर को बचा लिया। इससे पहले चीन ने मार्च 2016, अक्टूबर 2016 और अगस्त 2017 में आतंक के इस सरगना को बचाया है ....ये चौथी बार है जब चीन आतंकी मसूद अजहर पर मेहरबान हुआ है।

चीन ने दुनिया के सबसे बड़े मंच पर आतंकी को बचाने का काम किया है। इससे चीन का पर्दाफाश हुआ है। अब भारत को बाकी देशों के साथ मिलकर चीन के खिलाफ मोर्चा खोलना होगा। 

भारत को समझना होगा कि चीन आतंकी देश को पालने वाले पाकिस्तान के साथ आतंकियों को भी बचा रहा है। आतंकियों के खात्मा के लिए चीन के इस कारनामे के खिलाफ पूरे विश्व को एकजुट होना होगा।

हालांकि यूएन प्रवक्ता ने रिपब्लिक भारत से बातचीत में कहा कि चीन ने इसके लिए और समय मांगा है। सवाल है दस साल से ज्यादा वक्त हो चला है जब मसूद का मसला यूएन में उठा हो, अब चीन को कितना वक्त चाहिए? ये सब आतंक को बचाने के लिए चीन की चालबाजी है।

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