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सुनिश्चित करूंगा कि ‘नया पाकिस्तान’ में अल्पसंख्यकों को मिले बराबरी का दर्जा : इमरान खान

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार अपने देश और भारत में अल्पसंख्यकों के हालात की तुलना करते हुए कहा कि भारत में जो हो रहा है उसकी तुलना में ‘नये पाकिस्तान’ में अल्पसंख्यकों को बराबरी का दर्जा मिलेगा.

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की जयंती के मौके पर मंगलवार को खान ने कहा कि जिन्ना ने पाकिस्तान के ‘‘लोकतांत्रिक, न्यायपूर्ण और सद्भावनापूर्ण’’ राष्ट्र बनने का सपना देखा था.

खान ने ट्वीट किया, ‘‘नया पाकिस्तान कायद (जिन्ना) का पाकिस्तान होगा और सुनिश्चित करेगा कि हमारे अल्पसंख्यकों के साथ बराबरी का व्यवहार हो और भारत जैसा कुछ ना हो.’’ उन्होंने कहा कि जिन्ना चाहते थे कि अल्संख्यक भी बराबरी का दर्जा पाएं. यह याद रखा जाना चाहिए कि उनका शुरुआती राजनीतिक जीवन हिन्दू-मुसलमान एकता के लिए था.

खान ने कहा कि पृथक मुसलमान राष्ट्र के लिए संघर्ष उस वक्त शुरू हुआ जब उन्हें एहसास हुआ कि हिन्दू बहुलता वाले देश में मुसलमानों के साथ बराबरी का व्यवहार नहीं होगा.
 

बता दें, इससे पहले इमरान खान ने जिन्ना का जिक्र करते हुए आगे कहा कि वे कांग्रेस के बड़े नेताओं में एक थे. उन्हें हिंदू - मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता था. लेकिन उन्हें लगा कि कांग्रेस मुस्लिमों को बराबरी का अधिकार नहीं देगी. इसलिए उन्‍होंने अलग मुल्‍क की मांग की. वे नहीं चाहते थे कि मुसलमान दोयम दर्जे के नागरिक बने. पाकिस्तान की स्थापना करने वाले मोहम्‍मद अली जिन्‍ना का यही विजन था.

इमरान खान ने नसीरूद्दीन शाह का नाम लेते हुए कहा, 'आज के हिंदुस्‍तान में यही  हो रहा है. मैं नसीरूद्दीन शाह का पढ़ रहा था, वह जो बातें कर रहे हैं वह बातें जिन्‍ना कह चुके थे. वे समझते थे कि हिंदुस्‍तान में मुसलमानों को बराबर का नागरिक नहीं माना जाएगा. वही आज हिंदुस्‍तान में हो रहा है.'.

भारतीय राजनेताओं ने दी थी तीखी प्रतिक्रिया

इससे पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम)  के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने  ट्वीट करते हुए कहा था कि पाकिस्तान के संविधान के अनुसार सिर्फ इस्लाम धर्म से वास्ता रखने वाला ही वहां का राष्ट्रपति बन सकता है. वहीं भारत के इतिहास में कई ऐसे राष्ट्रपति बने जो अल्‍पसंख्‍यक समुदाय से आते थे. ये बिल्कुल सही समय है कि हमसे, हमारी विविधता और अल्‍पसंख्‍यकों को अधिकार देने के तरीके से कुछ सीखने का.

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