Cricket News

मिताली राज को बाहर रखने पर हरमनप्रीत को कोई खेद नहीं, कहा- 'टीम के हित में लिया था फैसला'

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ने विश्व टी-20 के सेमीफाइनल में करारी हार का सामना किया. मिताली राज जैसी अनुभवी खिलाड़ी को अहम मुकाबले से बाहर रखने का फैसले के कारण भले ही भारत को आईसीसी महिला विश्व टी-20 सेमीफाइनल में इंग्लैंड से शर्मनाक हार झेलनी पड़ी लेकिन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा कि उन्हें इस फैसले पर कोई खेद नहीं क्योंकि इसे टीम के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया था.

भारतीय बल्लेबाज बुरी तरह नाकाम रही और पूरी टीम 112 रन पर सिमट गई. उसके आखिरी 8 विकेट 24 रन के अंदर गिर गए थे. डगआउट में बैठी मायूस मिताली का चेहरा पूरी कहानी बयां कर रहा था.

टॉस के समय हरमनप्रीत ने कहा था, ‘‘ये मिताली के चयन की बात नहीं है, ये विजयी संयोजन को बनाए रखना है.’’ इस फैसले पर इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन और पूर्व भारतीय बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने कमेंट्री करते हुए सवाल उठाए लेकिन हरमनप्रीत ने अपने निर्णय का बचाव किया.

हरमनप्रीत ने मैच के बाद कहा, ‘‘हमने जो भी फैसला किया वो टीम के हित में किया. कई बार यह सही रहता है और कई बार नहीं, इसका खेद नहीं है. हमारी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह से बल्लेबाजी की उस पर मुझे गर्व है.’’ 

मिताली के स्ट्राइक रेट पर हमेशा सवाल उठाए जाते रहे हैं लेकिन तानिया भाटिया भी तेजी से रन नहीं बना पा रही थी और वेदा कृष्णमूर्ति अच्छी फार्म में नहीं चल रही थी और ऐसे में एक अनुभवी बल्लेबाज को बाहर रखना भारत पर भारी पड़ गया.

हरमनप्रीत ने कहा कि वो ऐसी बल्लेबाज चाहती थी जो मध्यक्रम में बल्लेबाजी कर सके जबकि मिताली पारी का आगाज करती हैं और वो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत दर्ज करने वाली टीम में कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहती थी.

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वास्तव में अच्छी बल्लेबाजी की और इसलिए हमने उसी टीम के साथ उतरने का फैसला किया. मिताली पारी की शुरुआत करती है. हमें किसी ऐसे बल्लेबाज की जरूरत थी जो स्मृति (मंदाना) और और मेरे बाद बल्लेबाजी कर सके. कई बार रणनीति सफल हो जाती है और कई बार नहीं.’’ हरमनप्रीत ने स्वीकार किया कि टीम ने 30 रन कम बनाए.

उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर ये अच्छा स्कोर नहीं था लेकिन तब भी मुझे भरोसा था अगर हम बेहतर गेंदबाजी कर पाते तो हम जीत सकते थे. लेकिन ये खेल का हिस्सा है अगर हमने 140-150 का स्कोर बनाया होता तो हम मैच जीत सकते थे.’’ 

भारतीय कप्तान ने कहा कि उनकी टीम के लिए एक सबक है. हरमनप्रीत ने कहा, ‘‘ये हमारे लिए सीख है क्योंकि हमारी टीम युवा है. कई बार आपको विकेट के हिसाब से अपना खेल बदलना पड़ता है. इंग्लैंड ने वास्तव में अच्छी बल्लेबाजी की और विकेट को अच्छी तरह से समझा लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं था और हम 18वें ओवर तक मैच खींचकर ले गए.’’ 

उन्होंने स्वीकार किया कि बड़े मैचों में मानसिक मजबूती एक मसला है और उनकी युवा टीम को इसमें खुद को बेहतर करना होगा. हरमनप्रीत ने कहा, ‘‘हमारी टीम युवा है और हमें मानसिक मजबूती पर काम करने की जरूरत है. अगर हम दबाव में खेलना सीख जाएं तो हमें पता चल जाएगा कि ऐसे मैचों में कैसे खेलना है.’’ 

वहीं इंग्लैंड की कप्तान हीथर नाइट ने कहा कि वो पावरप्ले के ओवरों में थोड़ा चिंतित थी जब स्मृति मंदाना आक्रामक बल्लेबाजी कर रही थी लेकिन उन्होंने अपनी स्पिनरों क्रिस्टी गोर्डन और सोफी एक्लेस्टोन की तारीफ की जिन्होंने टीम को शानदार वापसी दिलाई. 

उन्होंने कहा, ‘‘पावरप्ले में मैच थोड़ा हमारे हाथ से निकलता दिख रहा था लेकिन स्पिनरों ने वास्तव में अच्छी गेंदबाजी की और हमें वापसी दिलाई. क्रिस्टी ने अपने पहले दौर में ही बेजोड़ प्रदर्शन किया. सोफी भी युवा स्पिनर है और पिछले एक साल में उन्होंने दिखाया है कि वो एक अच्छी स्पिनर हैं.’’

(इनपुट: भाषा)

DO NOT MISS