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अंपायर के फैसले पर कैप्टन कूल एमएस धोनी ने खो दिया अपना आपा, चुकानी पड़ी कीमत

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को पूरी दुनिया कैप्टन कूल के नाम से जानती है। क्योंकि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों महेंद्र सिंह धोनी बेहद शांत रहते हैं।  लेकिन उन्होंने  राजस्थान के खिलाफ चेन्नई की बल्लेबाजी के दौरान 19वें ओवर में एक मौका ऐसा आया जब उन्होंने अपना आपा खो दिया ।

दरअसल, जब स्टोक्स की गेंद पर अंपायर ने नो बॉल देने के बाद फैसला बदल लिया था। इस पर धोनी आउटट होने के बावजूद गुस्से में मैंदान के अंदर आ गए  और अंपायर को दलीलें देने लेगे। हालांकि, फैसला नहीं बदलने पर वे गुस्से में ही लौटे। इसपर बीसीसीआई ने धोनी पर अंपायर से बहस करने के लिए मैच फीस का 50 फिसदी जुर्माना लगाया गया है।

बता दें आईपीएल के इतिहास में  यह पहला मौका था, जब धोनी गुस्से में मैदान के बीच में चले गए हों। बीसीसीआई ने इस हरकत को आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन मानते हुए धोनी पर जुर्माना लगाया है। धोनी ने भी अपनी गलती मानते हुए लेवल-2 के तहत जुर्माने का आदेश मान लिया। नियमों के मुताबिक, आईपीएल में किसी भी खिलाड़ी पर लगे जुर्माने को उसकी फ्रेंचाइजी भरती है।

वहीं इसपर  सुंदरम रवि और उल्हास गंधे की गलतियों से आईपीएल में अंपायरिंग के स्तर पर सवाल उठे हैं लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने सार्वजनिक तौर पर अपना गुस्सा जाहिर करके इस बहस को जन्म दे दिया है कि क्या स्टार खिलाड़ी मैच अधिकारियों को आसानी से धमका देते हैं । 

अपने सुनहरे कैरियर में पहली बार दो बार के विश्व कप विजेता पूर्व भारतीय कप्तान धोनी मैदान पर अंपायर गंधे से उलझ गए जिन्होंने गुरूवार की रात आईपीएल मैच में नोबाल देने के बाद वापिस ले ली थी ।

मशहूर अंपायर के हरिहरन ने कहा ,‘‘ स्टार खिलाड़ी अंपायरों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं लेकिन अंपायरों को देखना है कि वे दबाव में आते हैं या नहीं । यह अंपायर की शख्सियत पर निर्भर करता है ।’’ 

इससे पहले विराट कोहली ने एक अन्य मैच में लसिथ मलिंगा की नोबाल पर ध्यान नहीं देने पर आईसीसी एलीट पैनल के अंपायर रवि पर अपना गुस्सा निकाला था । 

कोहली ने कहा था ,‘‘हम क्लब क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं । अंपायरों को चतुराई से काम लेना होगा ।’’ 

कोहली को फटकार भी नहीं लगी जबकि आईसीसी आचार संहिता के तहत खिलाड़ी अंपायर के फैसले की सार्वजनिक तौर पर निंदा नहीं कर सकता ।

हरिहरन ने हालांकि कहा कि सभी अंपायर स्टार खिलाड़ियों के दबाव में नहीं आते और जो अपने फैसलों पर अडिग रहते हैं, उन्हें सम्मान मिलता है । 
 

( इनपुट-भाषा से भी )

 

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