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बल्लेबाजी के लिये अपनी बारी का इंतजार करना सबसे मुश्किल होता है : केदार जाधव

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

भारतीय आलराउंडर केदार जाधव को बल्लेबाजी के लिये अपनी बारी का इंतजार करना सबसे मुश्किल लगता है लेकिन उन्हें पता चल गया है कि स्टार खिलाड़ियों से भरे शीर्ष क्रम को देखते हुए उनके पास सीमित समय में अपनी उपयोगिता साबित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

विश्व कप के तीन मैचों में जाधव को दक्षिण अफ्रीका और आस्ट्रेलिया के खिलाफ बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिला जबकि पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने महज आठ गेंदे खेली थीं।

इतने कम समय में प्रदर्शन करना भी चुनौती होती है और जाधव इसे स्वीकार भी करते हैं। 

उन्होंने कहा, ‘‘सबसे मुश्किल चीज अपनी बारी का इंतजार करना होती है और ऐसा टूर्नामेंट में एक बार ही होता है जब आपको इतनी सारी गेंद खेलने का मौका मिलता है। जब से मैंने भारत के लिए खेलना शुरू किया है, तब से यह ऐसा ही रहा है क्योंकि पिछले चार वर्षों से हमारा शीर्ष क्रम बहुत मजबूत रहा है। ’’ 

जाधव को अफगानिस्तान के खिलाफ ही 68 गेंद खेलने का मौका मिला और उन्होंने क्रीज पर डेढ़ घंटे (88 मिनट) का समय बिताया।

महाराष्ट्र के इस बल्लेबाज ने कहा, ‘‘ जब सबकुछ ठीक होता है तो मुझे क्रीज पर बहुत कम समय मिलता है। आज मुझे कुछ गेंद मिलीं। मुझे छठे नंबर पर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया था। ’’ 

वहीं पूर्व कप्तान के श्रीकांत को लगता है कि भारत ने अफगानिस्तान के स्पिनरों की गेंदों का कुछ ज्यादा सम्मान किया तथा उन्हें और ज्यादा आक्रामकता से खेलना चाहिए था। 

श्रीकांत ने अफगानिस्तान पर मिली 11 रन की जीत के दौरान भारतीय कप्तान विराट कोहली की बेहतरीन कप्तानी की भी प्रशंसा की। 

भारत की 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य श्रीकांत ने आईसीसी में लिखे अपने कालम में कहा, ‘‘विकेट थोड़ा धीमा था लेकिन सच कहूं तो मुझे लगता है कि भारत मध्य के ओवरों में थोड़ा अटक गया था और उसे थोड़ा और ज्यादा आक्रामक होकर खेलना चाहिए था। ’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने अफगानिस्तान के स्पिनरों का कुछ ज्यादा ही सम्मान किया क्योंकि अफगानिस्तान ने अच्छी गेंदबाजी -विशेषकर नबी, मुजीब उर रहमान और राशिद खान- ने की लेकिन उन्होंने इतना अच्छा भी नहीं किया कि वे भारत को 225 रन पर रोक दे। लेकिन अंत में उन्होंने जीत हासिल की जो अहम था। ’’ 

श्रीकांत ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि विराट कोहली ने अफगानिस्तान के खिलाफ शानदार कप्तानी की और उनकी बेहतरीन नेतृत्व क्षमता के कारण ही भारत ने अंत में जीत हासिल की। ’’