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VIDEO -कारगिल जंग के 'रियल हीरो' सूबेदार संजय कुमार ने कहा - दुश्मन के हथियार से ही किया दुश्मन का सफाया

Written By | Mumbai | Published:

72 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कारगिल की जंग के रियल हीरो वीर योद्धा सूबेदार संजय कुमार ने रिपब्लिक टीवी के साथ खास बातचीत की. 23 साल पहले कारगिल युद्ध के दौरान ऊंची पहाड़ी पर दुश्मनों को मार गिराने वाले सूबेदार संजय कुमार का कहना है कि,कारगिल की जंग मेरे जीवन का एक अहम हिस्सा था.

संजय ने कहा , फौज की हमारी ट्रेनिंग होती है कि हमें किसी भी ऑपरेशन में कोई दिक्कत नहीं आए. 

जंग के दौरान हमारे सीनियर हर मूवमैंट को भांपते  हुए हमें सही राय दे रहे थे. हमारे बटालियन कमांडर वाय के जोशी ने ऑपरेशन प्लान किया था. हमारी टीम ने ग्राउंड पर जाकर उनके मास्टर प्लान को अंजाम दिया था.

प्लानिंग के मुताबिक ऑपरेशन को चार जुलाई की रात को अंजाम देनी थी. दुश्मन पहाड़ियों के ऊपर होने की वजह से हम ऑपरेशन रात में किया करते थे.

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कारगिल के युद्ध परमवीर विजेता राइफलमैन संजय कुमार को फ्लैट टॉप पाइंट 4875 पर कमांडर जोशी ने तिरंगा फहराने का जिम्मा दिया था. पहाड़ी पर पहले से ही दुश्मनों ने डेरा लगा रखा था. संजय ने कहा, हमारी टुकड़ी ने जैसे ही पहाड़ी चढ़नी शुरू की , दुश्मनों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी. इस दौरान मेरे साथ चल रहे कई साथी शहीद होए और कई घायल हो गिर गए. सुबह होते ही हम ऊपर पहुंच चुके थे .

 

संजय ने कुमार ने कहा हमारे बटालियन को मश्कोह घाटी में एक पोस्ट को कैप्चर करने का आदेश मिला. उस पोस्ट से पाक आर्मी तड़ातड़ हम पर फायरिंग कर रही थी उसने हमे सबसे ज्यादा नुकसान कर रहा था.  

हमने खुद रास्ता बना कर कठिन चढ़ाईयां चढ़ी. हमारे प्लान के मुताबिक अटैक नहीं कर पाए थे. 

कंपनी कमांडर गोपी शाह ने देखा की अटैक करने के लिए शाम तक का इंतजार करेंगे. तब तक ऊपर पहुंचे सारे जवान मारे जाएंगे. हमने फायर सपोट के साथ अटैक कर दिया. 

हम मश्कोह घाटी में एक पोस्ट तक पहुंच गए. हमारे एक जवान ने पोस्ट पर ग्रेनेड फेंका. जिससे दुश्मन काफी नुकसान हुआ. इसके बाद वह किस दो गन ने हमें सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा था उन गनों ने फायर करना बंद कर दिया. इसी मौके का फायदा उठा कर मैंने उन दोनों गनों को बाहर खिंच लिया. 

मैंने AK 47 से वहां मौजूद 3 पाक जवानों को मार गिराया. रास्ता बना कर हमने दूसरे बंकर पर अटैक करने पहुंचे. हमें दुश्मन के लोकेश का पता नहीं चल सका. उन्होंने हमारे ऊपर ताबड़तोड़ आधे घंटे तक फायरिंग की. हम अपनी चोटों को भूल कर यह सोच रहे थे कि उन्हें कैसे मार गिराएं. वह हमें मरा हुआ समझ कर ऊपर जाने लगे. हमने इसी मौके का फायदा उठा कर उन पर अटैक कर दिया और उन दोनों पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया.

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