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पोखरण परमाणु परीक्षण करने वाले 'रियल हीरो' रिटायर्ड कर्नल गोपाल कौशिश ने कहा- अमेरिकी सेटेलाइट को छकाते हुए परमाणु परीक्षण किया

Written By | Mumbai | Published:

72 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पोखरण परमाणु परीक्षण कर दुनिया में तहलका मचाने वाले रिटायर्ड कर्नल गोपाल ने रिपब्लिक टीवी के साथ खास बातचीत की. 

11-13 मई 1998 को भारत ने 3 परमाणु परीक्षण करने का जिम्मा भारत के 58वें इंजीनियर के तत्कालीन कमांडर कर्नल गोपाल कौशिक ने उठाया था और अपनी टीम को गोपनीय रहने का आर्डर दिया था. अमेरिका के चार और अन्य देशों के सेटेलाईट को छकाते हुए परमाणु परीक्षण किया था. 

यह उक्त बातें पोखरण परमाणु परीक्षण के कमांडिंग ऑफिसर रहे  रिटायर्ड कर्नल गोपाल कौशिक ने रिपब्किल टीवी से बताई . 

रिटायर्ड कर्नल गोपाल  ने बताया कि 1997 में पहली बार उन्होंने पोखरण का चार्ज लिया . उन्होंने कहा इससे पहले भारत सरकार वर्ष 1974 में परमाणु पर परीक्षण को अंजाम दिया था. इसके बाद भारत के परमाणु वैज्ञीनिकों के हर कदम पर नजर रखी जा रही थी.

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दो साल प्रीपेशन के बाद जनवरी 1997 को हमने पोखरन में मौजूद टीम से कहा यहां कुछ भी हो सकता है. हमें हर संभावनाओं के लिए तैयार रहना चाहिए. 

पोखरण परमाणु परीक्षण  के लिए हमने एक टीम की तरह काम किया . रिटायर्ड कर्नल कौशिक ने बताया कि वह 1998 परमाणु मिशन को अत्यंत गोपननीय था. लेकिन भारतीय सेना की इंजीनियरिंग रेजिमेंट और वैज्ञानिकों के मिशन को योजना अनुसार सफल बनाया.

बता दें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहार बाजपेयी ने भारत के परमाणु शक्ति संपन्न होने की घोषणा की और परिणाम स्वरूप भारत पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए गए. 

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भारत ने परमाणु परीक्षण को सफल बनाने के लिए इंडिया आर्मी की मदद ली और आर्मी की 58 इंजीनियरिंग रेजीमेंट इस परीक्षण का हिस्सा बनी थी. केंद्र में वाजपेयी की सरकार बने महज़ तीन महीने हुए थे और हर कोई इस बात को जानकर हैरान था कि सिर्फ तीन माह के अंदर अटल बिहारी वाजपेयी ने इतना बड़ा कदम उठा लिया. 

इस परीक्षण के दौरान अब्दुल कलाम आर्मी की यूनिफार्म में मौजूद थे उनकी इस टेक्निक के साथ ने अमेरिका को इस टेस्ट के दौरान अंधेरे में रखा था. आपको बता दें उस समय अब्दुल कलाम डीआरडीओ के मुखिया थे.
 

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