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300 से ज्यादा आर्मी ऑफिसर अपने मौलिक अधिकारों को जानने पहुंचे कोर्ट ...

Written By | Mumbai | Published:

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार का दिन काफी अहम होने वाला है. लगभग 300 से अधिक आर्मी ऑफिसर देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने मणिपुर में आर्मी की स्थिति को लेकर आवाज उठाएंगे. आर्मी ये सवाल उठाएगी की अगर मणिपुर में उनके द्वारा सैन्य कार्यवाई की जाती है तो क्या उसे देश के हित में नहीं समझा जाए? एक आर्मी ऑफिसर की हैसियत से अगर वो मणिपुर में अपने काम को करते हैं तो वो गैरकानूनी कैसे है? 300 से अधिक अधिकारी सुप्रीम कोर्ट में अपने मौलिक अधिकारों को लेकर कोर्ट में अपनी बात रखेंगे.

''मणिपुर एनकाउंटर'' को लेकर इस बार आर पार के मूड में आर्मी -

सैनिक के अधिकारों को लेकर वो अपनी बात रखेंगे. आर्मी ''मणिपुर एनकाउंटर'' को लेकर इस बार आर पार के मूड में है. आर्मी ऑफिसर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को writ petition फाइल करेंगे. जिसमें आर्मी के द्वारा कई सवाल पूछे जाएंगे. 

जैसे, जब एक सैनिक अपने विवेक के अनुसार अपना काम करता है तो उसे न्यायिक जांच के तहत कैसे रखा जा सकता है? इसके साथ ही 'क्या राष्ट्रीय सुरक्षा से ऊपर भी कुछ है?'

बता दें, 2 अगस्त को मणिपुर में कथित फेक एनकाउंट के संबंध में सीबीआई ने एक सेना के अधिकारी पर केस किया था. सीबीआई ने ये कदम सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश पर उठाया था. बता दें, ये केस साल 2009 का था. इस घटना को फर्जी मुठभेड़ कहा गया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक कमीशन बनाकर इसकी जांच के आदेश दिए थे. इससे पहले, जुलाई 2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने कथित हत्याओं के 40 से अधिक मामलों को सीबीआई को सौंपा था.

इस वक्त सुप्रीम कोर्ट मेजर आदित्य के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल कर्मवीर सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जो अपने बेटे के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की मांग कर रहे हैं. लेफ्टिनेंट सिंह ने अपनी याचिका में कहा था कि मेजर आदित्य पर "गलत और मनमाने ढंग से" FIR की गई है क्योंकि यह घटना एक सेना के काफिले से संबंधित है जो AFSPA के तहत एक क्षेत्र में भरोसेमंद सैन्य कर्तव्य पर थी. बता दें, सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले पर सोमवार को अहम सुवाई कर सकता है.

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