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शत्रुघ्न सिन्हा का राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर कड़ा प्रहार- J&K में जो हुआ वह लोकतंत्र से खिलवाड़ है...

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग किए जाने को लोकतंत्र से खिलवाड़ बताते हुए बृहस्पतिवार को यहां कहा कि कश्मीर में जो हुआ है वह नहीं होना चाहिए था . वह प्रयागराज में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और अपना दल की नेता कृष्णा पटेल के साथ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे .

आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में राजग के दोबारा सत्तासीन होने की संभावना पर सिन्हा ने कहा, “मैं ज्योतिषी नहीं हूं, लेकिन मैं पूरे देश में घूमता रहा हूं और अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि बहुत कठिन है डगर पनघट की .”

भाजपा सांसद सिन्हा ने राम मंदिर के मुद्दे पर कहा, “मेरे लिए राम मंदिर का मुद्दा सही मायनों में ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ का मुद्दा है या हितों के टकराव का मुद्दा है . इतना जरूर कहना चाहूंगा कि मेरे लिए मानव मंदिर का निर्माण सबसे अहम है . मानवता का निर्माण जिसमें रोजगार, स्वास्थ्य, तरक्की, खुशहाली आदि शामिल हैं .”

मोदी सरकार के नोटबंदी और जीएसटी के फैसले की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “जो अभूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी नहीं सोचा, वह (नोटबंदी) आपने तुगलकी फरमान जारी करके रातों रात कर दिया . महिलाओं ने सालों से जो पैसा जमा करके रखा था उसे आपने हवा हवाई कर दिया . हमारे मजदूर, नौजवान, छोटे दुकानदार पूरी तरह ध्वस्त हो गए .”

उन्होंने कहा, “अचानक की गई नोटबंदी से लोग उबर भी नहीं पाए थे कि अचानक नीम पर करेला चढ़ा.. आपने एक देश, एक कर के नाम पर जीएसटी ला दिया . इस मामले में न काउंसलिंग दी, न ट्रेनिंग दी . कोई तो चाहिए बोलने वाला .”

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार की रात राज्य विधानसभा को भंग कर दिया था. जिसके कुछ देर पहले ही पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने गठबंधन कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था. इस गठबंधन में पीडीपी, एनसी और कांग्रेस शामिल थे. इसके साथ ही विधानसभा को भंग कर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि जम्मू कश्मीर के संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है. 

इसके साथ ही राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए कहा, 'हफ्ता दस दिन से मैं देख रहा था बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त हो रही थी. महबूबा जी खुद ही शिकायत कर रही थीं कि मेरी पार्टी को तोड़ने की कोशिश हो रही है. कुछ लोग कह रहे थे कि ये लोग एक गठबंधन बनाने की कोशिश में हैं.. इन्होंने कभी एक साथ सरकार बनाई नहीं है.. ये एक तरह से अवसरवादी गठबंधन था. सत्ता पाने के लिए ये गठबंधन हो रहा था. ये वो लोग है जो चुनाव के खिलाफ थे.'

(इनपुट - भाषा)

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