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राहुल के बाद CM ममता बनर्जी ने की इस्तीफे की पेशकश, TMC ने किया खारिज

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की शनिवार को पेशकश की लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसे खारिज कर दिया।

बनर्जी ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पहला संवाददाता सम्मेलन संबोधित करते हुए भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने पश्विम बंगाल में वोट प्राप्त करने के लिए लोगों का धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण किया।

बनर्जी ने कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक बैठक में मैंने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की पेशकश की। यद्यपि पेशकश पार्टी द्वारा खारिज कर दी गई और मैं पद पर बनी रह सकती हूं।’’

उन्होंने भाजपा के शानदार प्रदर्शन पर संदेह उत्पन्न किया। उन्होंने दावा किया, ‘‘यह बड़ी जीत संदेह से परे नहीं है। यह काफी आश्चर्यजनक है कि कैसे विपक्ष का कई राज्यों में पूरी तरह से सफाया हो गया। कुछ ‘जोड़तोड़’ हैं और विदेशी शक्तियां भी शामिल हैं।’’

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने यह भी कहा कि भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए राज्य में आपातकाल जैसी स्थिति बनायी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए शनिवार को पार्टी की कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन सदस्यों ने इसे ठुकरा दिया और प्रतिकूल परिस्थिति में उनसे पार्टी का नेतृत्व करते रहने का आग्रह किया।

साथ ही सीडब्ल्यूसी की बैठक में गांधी को पार्टी संगठन में आमूलचूल परिवर्तन के लिए अधिकृत किया गया।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में लोकसभा चुनाव में करारी हार के कारणों पर मंथन किया गया और एक प्रस्ताव पारित किया गया।

बाद में पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संवादाताओं से कहा, 'राहुल गांधी जी ने इस्तीफे की पेशकश की। सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से उनकी पेशकश को खारिज किया और आग्रह किया कि आपके नेतृत्व की जरूरत है और आगे भी रहेगी।'

सीडब्ल्यूसी की बैठक में राहुल गांधी के अलावा संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और कार्यसमिति के अन्य सदस्य शामिल हुए।

गौरतलब है कि इस लोकसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। वह 52 सीटों पर सिमट गई है। 2014 के चुनाव में 44 सीटें जीतने वाली पार्टी को इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन उसकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।