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राममंदिर पर VHP की सरकार को नसीहत, ''फैसले के इंतजार से बेहतर है कि कानून लाया जाए''

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

जैसे-जैसे 2019 का लोकसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर राजनीतिक शोर बढ़ता जा रहा है. जाहिर है कुछ ही महीने में भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा ऐसे में विश्व हिंदू परिषद ने सरकार से मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की है. 

विश्व हिंदू परिषद ने आज मीडिया के सामने सरकार को ये सलाह दिया है कि मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने से बेहतर है कि कानून लाकर मंदिर का निर्माण कराया जाए.

VHP नेता आलोक कुमार ने मीडिया के सामने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और कहा ये मामला उनकी प्रायोरिटी का नहीं है. इस मामले को 2019 के पहले हफ्ते में संबंधित पीठ द्वारा सुनवाई के लिए टाल दिया गया था. अब ये सुनवाई 4 जनवरी को होने वाली है. पर जिस पीठ को इसको सुनना चाहिए उसका गठन नहीं हुआ है.''

उन्होंने कहा, ''ये मामला फिर से चीफ जस्टिस की कोर्ट में आया है. सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने ही जो ऑफिस रिपोर्ट निकाली है. उसमें ये भी कहा है कि कुछ मामलों में जिन पक्षकारों की मृत्यु हो गई थी. उनके वारिस रिकॉर्ड पर नहीं लाए गए हैं. सब मिलाकर पीठ का गठन नहीं हुआ, कुछ अपीलों की प्रक्रियाएं बाकी है. हमें लग रहा है कि सुनवाई अभी भी कोसों मील दूर है. सभी पहलुओं के समग्र चिंतन के बाद विश्व हिंदू परिषद का यह स्पष्ट मत है कि हिंदू समाज अनंत काल तक न्यायालय के निर्णय की प्रतिक्षा नहीं कर सकता. ''

आलोक कुमार ने कहा कि हमारी ये समझ है कि उचित मार्ग ये होगा कि संसद द्वारा कानून बनाकर भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का मार्ग अभी प्रशस्त किया जाए. परिषद अपनी इस मांग के पूरा होने तक लगातार जन जागरण करती रहेगी.

उन्होंने ये भी बताया, ''इसमें आगे कौन से कदम उठाए जाएंगे इस संबंध में 31 जनवरी और 1 फरवरी को प्रयागराज में कुंभ के मौके पर धर्म संसद होगी. और पूज्य संसद हमारे लिए निर्णय करेंगे कि इस मांग को पूरा कराने के लिए और कौन से कदम उठाए जाए.''

''लोकतंत्र में ये अधिकार है कि वो सरकार को अपने प्रति पर्सुएड करने के लिए प्रयत्न करें.''

उन्होंने कहा कि हम नहीं जानते कि उनके (सरकार) मन में क्या है पर हमारे मन में ये स्पष्ट है कि न्यायिक प्रक्रिया के पूरे होने के बाद कानून लाने के बजाय वो कानून आज लाया जाना चाहिए. और इसीलिए इस सरकार के इसी कार्यकाल में संसद में कानून आए इसके लिए हम सरकार से आग्रह करते रहेंगे. 

आलोक कुमार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जा रही धीमी सुनवाई का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा बीते 69 सालों से फंसा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में अब तक जजों की बेंच भी नहीं बनी है जहां मामले की सुनवाई होनी है.

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गौरतलब है कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में राम मंदिर के मुद्दे पर कहा था कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही है, उसके बाद ही अध्यादेश लाने के बारे में विचार किया जाएगा.
 

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