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राफेल पर जेटली ने राहुल गांधी की ली चुटकी, कहा- ''इनका ज्ञान तो ABC से शुरू करना पड़ेगा''

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

राफेल सौदे को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर गंभीर आरोप लगाते आ रहा है. इसे लेकर सियासत गरमाती जा रही. लोकसभा में राफेल सौदे को लेकर बहस के दौरान राहुल गांधी ने कुछ सवाल पूछे तो केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार की तरफ से जवाब देते हुए करारा प्रहार किया.

जैसे ही मंत्री अरुण जेटली ने बोलना शुरू किया विपक्ष हो-हल्ला शुरू कर दिया. जिसपर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि सच्चाई सुनने में क्यों तकलीफ हो रही है. ये 500 बनाम 1600 का जो तर्क है. ये बहुत सादगी का तर्क है. और उसका कारण ये है कि इस देश में कुछ लोग और कुछ परिवार ऐसे हैं. जिनकों पैसों का गणित समझ में आता है. देश की सुरक्षा के साथ जुड़े हुए मुद्दे नहीं समझ आते हैं.

उन्होंने कहा, ''अध्यक्ष महोदया, ये राफेल का मामला क्या है. राफेल जहाज किस लिए देश को चाहिए था. आपको याद होगा जब कारगिल का युद्ध हुआ तो कारगिल के युद्ध के दौरान हमारी सेना केवल 155MM बंदूक का इस्तेमाल करती थी, पहाड़ की चोटी पर बैठे हुए दुश्मनों के लिए. अगर उस वक्त हमारे पास राफेल जैसा माध्यम मल्टि रोल कॉम्बैट एयरक्राप्ट होता तो 100, 150-200 किलोमीटर की दूरी से मिसाइल उनको वहां से उड़ा सकते थे.

जेटली ने बोला कि यही कारण था कि देश की फौज ने 2001 में कहा हमें चाहिए और 2001 में सरकार ने इसको मंजूरी दे दी. 2003 में ये कहा कि ये बहुत जरूरी है. जब UPA सरकार ने मंजूरी दे दी गई तो सन् 2007 में इसके लिए टेंडर बुलाए गए. सरकार दो तरीकों से डिफेंस समझौता करती है. या टेंडर के माध्यम से करती है या इंटर गवर्नमेंट एग्रीमेंटल के माध्यम से करती है. सरकार-सरकार के बीच समझौता होता है. 2007 में जब ये निर्णय हो गया. 

उन्होंने कहा, ''अध्यक्ष जी, जब नई सरकार बनी तो सबसे पहले ये आग्रह हमें किया गया कि दुश्मन देशों के पास 400 की संख्या में कॉमेबैट एयरक्राफ्ट हैं.''

इस बीच हंगामा तेज हो जाता है. विपक्षी सदस्यों ने सदन में कागज के जहाज उड़ाने शुरू कर दिया जिसके बाद हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी जाती है. 

इसके बाद साढ़ें 3 बजे एक बार फिर सदन की कार्यवाही शुरू हुई और जेटली ने कहा, 'माननीय अध्यक्ष जी मैं बतला रहा था कि एयरफोर्स को राफेल की जरूरत क्या था. हवाई जहाज सिर्फ उड़ने का वाहन होता है. लेकिन उसपर जो एवियोनिक्स होते हैं जो उसपे वेपेनरी होती है उससे दुश्मन के मुकाबले में लड़ाई लड़ी जाती है. और इसलिए असली कीमत और असली क्षमता जो होती है. उनमें लगे हुए हथियारों पर निर्भर करता है.''

''क्योंकि हमारे एयफोर्स का ये आग्रह था कि हमारे पड़ोस में दो देश हैं जिनसे हमारे सैनिक संबंध अच्छे नहीं हैं. उनके पास लगभग 400 के करीब कॉम्बैट जहाज हैं और इसलिए तुरंत हमारी एयरफोर्स को कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की जरूरत है.''

उन्होंने कहा कि 2001 में ये प्रक्रिया शुरू हुआ थी. और जो लोग नीति निर्माण में हैं, सरकार और शासन चलाने में हैं ये उनका दायित्व है कि देश की फौज की भी हम लोग चिंता करें. 2001 से फौज मांग कर रही थी और 2012 में मंत्री जी लिखते हैं कि मैं राफेल को मंजूरी देता हूं लेकिन जिस प्रक्रिया से ये तय किया है उसके उपर पुनर्विचार किया जाए. 

जेटली बोलें, ''2014 तक कुछ नहीं हुआ और सरकार बदलने के बाद एक बार फिर इस देश की वायुसेना ने इस आग्रह को देश के सामने रखा. ये आग्रह था कि तुरंत इसको लाया जाए.''

''इन सभी बैठकों के बाद जब 2015 में प्रधानमंत्री जी गए और जो राहुल जी ने विषय उठाए हैं अब उसके उत्तर पर आता हूं. मैं चाहूंगा कि मेरे कांग्रेस के मित्र भी ये देश की सुरक्षा का मामला है इसलिए गंभीरता के साथ इन विषयों को समझ लें. प्रधानमंत्री जी की जो प्रेसिडेंट हॉलैंड के साथ जो बैठक हुई,.. और जो प्रेस स्टेटमेंट जारी हुई उसमें था कि हम लोग इंटर गवर्नमेंट एग्रीमेंट के तहत खरीदेंगे. जो UPA के जमाने में टर्म्स एंड कंडिशन थी उससे बेहतर टर्म्स एंड कंडिशन पर करेंगे. ये कहा गया कि प्रोसेस क्या था.''

'किस तरह के वेपन्स चाहिए इसके लिए 74 मीटिंग हुई,, जब समझौता फाइनल हुआ तो मामला रक्षा मंत्री के पास जाता है.'

उन्होंने कहा कि सारी प्रक्रिया के बाद सरकार 2016 में सरकार दसॉल्ट के साथ समझौता तय करती है. इस प्रोसेस पर सुप्रीम कोर्ट क्या कहता है. किसी माननीय सदस्य के पास ये अधिकार नहीं है कि यहां खड़े होकर कहे कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत है.

''सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमने प्रॉसेस की जांच की है. हम संतुष्ट हैं.''

राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों पर जेटली ने कहा कि दूसरा विषय.. 

''मैं एक बात समझा दूं कि कृया कर के अपने दल की और उस दल में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर जो हैं उसकी प्रतिष्ठा और गरिमा को मद्देनज़र रखिए. ये 500 और 1600 की तुलना क्या है?''

वित्त मंत्री ने कहा कि 2016 में जो सौदा हुआ, उसके आधार पर बेयर एयरक्राफ्ट (विभिन्न युद्धक प्रणालियों से विहीन विमान) का दाम  UPA की कीमत से नौ प्रतिशत कम था और हथियारों से युक्त विमान की बात करें तब यह संप्रग की तुलना में भी 20 प्रतिशत सस्ता था.

जेटली ने कहा कि क्या एक औद्योगिक घराने को लाभ दिया है. कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष को आफसेट का पता नहीं है, ये दुख की बात है. राहुल जी को ABC का ज्ञान नहीं है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी बोफोर्स, अगस्ता मामले में जुड़ी है, घोटालों से जुड़ी है. आफसेट का मतलब है कि किसी विदेशी से सौदा करते हैं तो कुछ सामान अपने देश में खरीदना होता है. राफेल में 30 से 50 प्रतिशत सामान भारत में खरीदने की बात है.

उन्होंने कहा कि कुल आफसेट 29 हजार करोड़ रूपए का और आरोप 1.30 लाख करोड़ रूपए का लगाया जा रहा है. आफसेट तय करने का काम विमान तैयार करने वाली कंपनी का है.

जेटली ने कहा कि ऐसी नासमझी की एक ऐसे दल के अध्यक्ष से अपेक्षा नहीं है जिसे बड़े बड़े दिग्गज लोगों ने नेतृत्व प्रदान किया.

उन्होंने कहा कि एचएएल 2.7 गुणा अधिक समय मांग रही थी. फौज जल्द विमान मांग रही थी. इस संबंध में 2016 में संप्रग से बेहतर शर्तों पर वर्तमान सरकार के स्तर पर समझौता किया गया.

वित्त मंत्री ने कहा कि राफेल विमान के संबंध में सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट हो गया लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष की चुनावी जरूरत संतुष्ट नहीं हुई. 

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जेपीसी की मांग को खारिज करते हुए जेटली ने कहा कि इसमें संयुक्त संसदीय समिति नहीं हो सकती है, यह नीतिगत विषय नहीं है. ये मामला सौदे के सही होने के संबंध में है. सुप्रीम कोर्ट में यह सही साबित हुआ है.

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