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राम मंदिर विवाद पर बोले रविशंकर प्रसाद- पिछले 70 साल से टल रहा है मामला, जल्द हो समाधान...

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई को एक बार फिर टाल दिया गया है। जिस पर अब कानून मंत्री ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि देश की जनता इस मामले पर जल्दी सुनवाई चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि ये मामला 70 सालों से लटका हुआ है। देश की जनता अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण चाहती है। बतौर देश के नागरिक मैं कहना चाहूंगा कि इस मामले का जल्द से जल्द समाधान होना चाहिए।' 

केंद्रीय मंत्री ने पटना में संवादाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'देश की बहुत बड़ी जनता की अपेक्षा है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी चीफ अमित शाह बोल चुके हैं कि इस मामले का निपटारा संवैधानिक तरीके से होना चाहिए।'

बता दें, इससे पहले राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद भूमि मालिकाना हक विवाद मामले की सुनवाई 29 जनवरी को होने वाली सुनवाई निरस्त हो गई थी. इसे लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने नाराजगी भी जाहिर की थी।

उच्चतम न्यायालय ने पांच सदस्यीय संविधान पीठ के एक सदस्य के उपलब्ध नहीं होने के कारण राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में 29 जनवरी को होने वाली सुनवाई निरस्त कर दी है।

उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा जारी नोटिस के अनुसार प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ अब इस दिन सुनवाई नहीं करेगी क्योंकि न्यायमूर्ति एस ए बोबडे इस दिन उपलब्ध नहीं होंगे।

नोटिस के मुताबिक, ‘‘इस बात का संज्ञान लिया जाए कि न्यायमूर्ति एस ए बोबडे के उपलब्ध नहीं होने की वजह से 29 जनवरी, 2019 को प्रधान न्यायाधीश की अदालत में संविधान पीठ के समक्ष होने वाली सुनवाई निरस्त की जाती है। इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर शामिल हैं।’’ 

इससे पहले मूल पीठ में शामिल रहे न्यायमूर्ति यू यू ललित ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था और 25 जनवरी को पुन: पांच जजों की संविधान पीठ का गठन किया गया था।

जब नयी पीठ का गठन किया गया तो न्यायमूर्ति एन वी रमण को भी पुनर्गठित पीठ से अलग रखा गया। इसकी कोई वजह नहीं बताई गयी।

इस मसले पर सुनवाई करने वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सदस्य रहे न्यायमूर्ति यू यू ललित ने खुद को इस सुनवाई से अलग कर लिया था। जिस वजह से सुनवाई के लिए अगली बेंच का गठन किया जाना था और मामले की सुनवाई के लिए 29 जनवरी की तारीख तय की गई थी। लेकिन अभी तक बेंच का गठन नहीं हुआ है जिसके चलते सुनवाई निरस्त हो गई।

(इनपुट- भाषा)

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