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रविशंकर प्रसाद बोले- 'सामान्य वर्ग का आरक्षण' पहला छक्का नहीं, अभी ऐसे और भी छक्के लगेंगे...."

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के मोदी सरकार के फैसले को मैच जिताने वाला छक्का बताते हुये बुधवार को कहा कि अभी इस मैच में विकास से जुड़े और भी छक्के देखने को मिलेंगे .

सामान्य वर्ग को शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण देने संबंधी संविधान 124वें संशोधन विधेयक पर बुधवार को राज्यसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुये प्रसाद ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुये कहा कि सरकार ने यह साहसिक फैसला समाज के सभी वर्गों को विकास की मुख्य धारा में समान रूप से शामिल करने के लिये किया है .

सरकार पर अपने वादों को पूरा नहीं करने के विपक्ष के आरोप पर प्रसाद ने कहा ‘‘मैच जिताने वाला यह पहला छक्का नहीं है, अभी ऐसे और भी छक्के लगेंगे .’’

उन्होंने इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में नहीं टिक पाने की विपक्ष की आशंकाओं को निर्मूल बताते हुए कहा कि आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा संविधान में नहीं लगायी गयी है .

उच्चतम न्यायालय ने यह सीमा सिर्फ पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जाति एवं जनजाति समूहों के लिये तय की है . प्रसाद ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक के द्वारा संविधान के अनुच्छेद 15 में कम आय वर्ग वाले सामान्य वर्ग के लोगों को शैक्षिक आधार पर और अनुच्छेद 16 में रोजगार में नौकरी में आरक्षण के लिये संशोधन कर नये प्रावधान जोड़े जाएंगे .

संविधान के मौलिक ढांचे से छेड़छाड़ के आरोप पर प्रसाद ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 368 संसद को मौलिक अधिकार सहित संविधान के किसी भी भाग में किसी भी प्रकार का बदलाव करने का अधिकार देता है.

लोकसभा से पास हुआ बिल

लोकसभा में आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदम का लगभग सभी पार्टियों ने समर्थन किया था. विधेयक लोकसभा में 323 मतों के साथ पास हो गया.  इसके विरोध में 3 वोट पड़े ​​​​​​​

कैबिनेट ने सोमवार को आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के लिए 10 फीसदी आरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.

कांग्रेस ने कहा कि वह आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए विधेयक के समर्थन में है, लेकिन उसे सरकार की मंशा पर शक है. पार्टी ने कहा कि सरकार का यह कदम महज एक ‘‘चुनावी जुमला’’ है और इसका मकसद आगामी चुनावों में फायदा हासिल करना है.

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