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राफेल पर झूठ बेनकाब: जिस चिट्ठी के जरिए राहुल गांधी ने PM मोदी पर लगाया 'नेगोशिएशन' का आरोप, उस चिट्ठी में छोड़ा गया था ये बड़ा फैक्ट

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

राफेल मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय (एमओडी) के पत्र का हवाला देते हुए एक अंग्रेजी अखबार के लेख बाद से एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी आमने- सामने आ गए हैं. दरअसल अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने इसको लेकर आपत्ति जताई कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने राफेल विमान सौदे को लेकर फ्रांस के साथ समानांतर बातचीत की. जिससे इस बातचीत में रक्षा मंत्रालय का पक्ष कमजोर हुआ. इसी आधार पर अब विपक्ष ने मोदी सरकार पर हमला किया है.

लेकिन दरअसल अंग्रेजी अखबार में पत्र को पूरा नहीं दिखाया गया. लेकिन अब जो चिट्ठी सामने आ रही है उसमें तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा राफेल वार्ताओं पर एमओडी असहमति को दिए गए जवाब वाली चिट्ठी लगी है. जिसमें लिखा गया है कि इसे देखकर ऐसा लगता है कि पीएमओ और फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय इस मुद्दे की प्रगति पर निगरानी रखे हुए हैं. इसका प्रमाण अभी हाल ही हुए शिखर बैठक से लग सकता है.

दूसरी तरफ राफेल सौदे की वार्ता के समय रक्षा सचिव रहे जी मोहन कुमार ने राहुल के आरोपों पर कहा, 'उसका (राफेल वार्ता को लेकर असहमत होना) कीमतों से कोई लेना-देना नहीं है। यह संप्रभु गारंटी और सामान्य नियम और शर्तों को लेकर था। हालिया मीडिया रिपोर्ट में जो भी सामने आया है उसका कीमतों से कोई लेना-देना नहीं है।'

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी सफाई....

राफेल सौदे को लेकर एक अखबार की खबर को सिरे से खारिज करते हुए लोकसभा में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘‘यह गड़े मुर्दे उखाड़ने के जैसा है।’’ विपक्ष पर निशाना साधते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘विपक्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निहित स्वार्थ से जुड़े तत्वों के हाथों में खेल रहा है। उनकी (विपक्ष) वायु सेना को मजबूत बनाने में कोई रूचि नहीं है।’’ 

अखबार की खबर के जरिये लगाये जा रहे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करते हुए सीतारमण ने कहा कि पीएमओ की ओर से विषयों के बारे में समय-समय पर जानकारी लेना हस्तक्षेप नहीं कहा जा सकता है।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर लगाए गंभीर आरोप 

राहुल गांधी ने अंग्रेजी के प्रतिष्ठित अखबार ‘द हिंदू’ की एक खबर की पृष्ठभूमि में यह भी आरोप लगाया कि इस विमान सौदे को लेकर मोदी ने फ्रांस के साथ 'समानांतर बातचीत कर रक्षा मंत्रालय के पक्ष को कमजोर किया और पूरी प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए अपने ‘मित्र’ अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपये का कांट्रैक्ट दिलवाया। 

उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ हम यह एक साल से कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री राफेल घोटाले में सीधे तौर पर शामिल हैं। अखबार की रिपोर्ट से साफ है कि प्रधानमंत्री फ्रांस के साथ समानांतर बातचीत कर रहे थे। मैं देश के युवाओं और रक्षा बलों से कहना चाहता हूं कि अब स्पष्ट हो चुका है कि प्रधानमंत्री ने प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए आपके 30 हजार करोड़ रुपये चुराए और अपने मित्र अनिल अंबानी को दे दिए। इसकी जांच होनी चाहिए।’’ 

गांधी ने कहा, ‘‘ पहले फ्रांस्वा ओलांद (फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति) ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बोला था कि अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपये का अनुबंध दिया जाए। अब रक्षा मंत्रालय कह रहा है कि प्रधानमंत्री ने चोरी की है। पूरा मामला एकदम स्पष्ट है।’ 

उन्होंने कहा, ‘‘ वायुसेना के मेरे पायलट मित्रों, आप लोग समझ लो कि ये 30 हजार करोड़ रुपये आपके लिए इस्तेमाल हो सकते थे । उन्होंने ये पैसे अनिल अंबानी को दे दिए। अब साफ हो चुका है कि प्रधानमंत्री ने इस देश से चोरी की है। मैं कड़े शब्द इस्तेमाल नहीं करता, लेकिन करने को विवश हो रहा हूं कि भारत के प्रधानमंत्री चोर हैं।’’ 

मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मोदी सरकार को घेरा

इससे पहले लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया में आई रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि यह छोटी बात नहीं है। प्रधानमंत्री कहते हैं कि कांग्रेस लड़ाकू विमान खरीदने को रोक रही है। जबकि हकीकत इसके उलट है।

खड़गे ने कहा कि कांग्रेस नीत सरकार के समय 126 लड़ाकू विमान खरीदने की सहमति बनी थी लेकिन 36 विमान खरीदे जा रहे हैं। एक तरफ रक्षा मंत्रालय है और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री कार्यालय है, और कई तरह की बातें सामने आ रही हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने दागे सवाल

तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि अखबार की खबर में यह बात सामने आई है कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस मामले में समानांतर वार्ता कर रहा था। इस बारे में रक्षा मंत्रालय की ओर से इस समानांतर वार्ता पर आपत्ति व्यक्त की गई थी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय क्यों इस मामले में हस्तक्षेप कर रहा था ? प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इन्होंने देश की प्रतिरक्षा की रीढ़ को कमजोर किया है।

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