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राफेल पर कथित ‘नोट’ दिखाता है कि पर्रिकर सौदे पर बातचीत से अनजान थे : उमर अब्दुल्ला

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि राफेल सौदे पर रक्षा मंत्रालय का कथित ‘नोट’ इस ओर इशारा करता है कि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को लड़ाकू विमान सौदे पर हो रही बातचीत की कोई जानकारी नहीं थी।

वह ‘द हिंदू’ अखबार में छपी एक खबर पर प्रतिक्रिया दे रहे रहे जिसमें दावा किया गया है कि भारत एवं फ्रांस के बीच हुए 59,000 करोड़ रुपये के राफेल सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के ‘समानांतर बातचीत’ करने पर रक्षा मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

अब्दुल्ला ने कहा कि कथित नोट में दावा किया गया है कि यह स्पष्ट है कि इस ‘समानांतर बातचीत’ ने रक्षा मंत्रालय एवं भारत की वार्ता टीम के पक्ष को कमजोर किया’।” 

उन्होंने कहा, “तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर बातचीत की प्रक्रिया से अनभिज्ञ थे। वह बस इतना कह सकते थे कि, ‘ऐसा लगता है कि पीएमओ एवं फ्रांस का राष्ट्रपति कार्यालय प्रक्रिया पर नजर रखे हुए था।’ उन्हें प्रक्रिया की सीधी जानकारी नहीं थी और उन्होंने इसे पीएमओ के हवाले कर दिया।” 

अब्दुल्ला ने एक के बाद एक ट्वीट कर कहा, “वह कैसे दावा कर सकते हैं कि ‘पैरा पांच जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया है’ जब उन्हें बातचीत की सामग्री या स्थिति की कोई सीधी जानकारी नहीं थी? पीएमओ के साथ सुलझाने के लिए मामले को रक्षा सचिव को भेज देना दिखाता है कि उनके पास अपने ‘जरूरत से अधिक प्रतिक्रिया” वाले आकलन के लिए कोई आधार नहीं था।” 

इससे पहले जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह यह देखना चाहते हैं कि भाजपा से संबद्ध लोग सौदे पर आई इस नयी खबर पर क्या सफाई देंगे।

उन्होंने कहा, “इस पर क्या सफाई देंगे। रक्षा मंत्री तक पहुंची मंत्रालय की फाइल के इस नोट के मुताबिक पीएमओ इंडिया, ‘ने रक्षा मंत्रालय एवं भारत की वार्ता टीम के पक्ष को कमजोर किया’।” 

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान नेकां राजग की सहयोगी थी लेकिन 2009 में उसने संप्रग-दो से हाथ मिला लिया था।

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