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पेंशन को लेकर घमासान जारी... तपन भौमिक ने कहा, ''कमलनाथ की दमनकारी सरकार का तुगलकी फरमान''

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

MISA बंदियों को मिलने वाली पेंशन पर अस्थाई रोक लगाने वाले कमलनाथ सरकार के फैसले पर सियासी घमासान लगातार जारी है. सरकार के फैसले को लेकर सियासी पारा गरम हो चुका है. विरोध के क्रम में इस बीच लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने रिपब्लिक टीवी से बात की.

इसे लेकर सरकार का कहना है कि जिन्हें पेंशन मिलती है उसकी जांच के बाद इसे फिर से शुरू किया जाएगा. हालांकि इस जांच में कितना वक्त लगेगा यह अभी साफ नहीं किया गया है.

रिपब्लिक टीवी से हुई खास बातचीत के दौरान तपन भौमिक से हमने पूछा कि क्या लगता है कि कांग्रेस सरकार ने क्यों इस कदम को उठाया है, खास तौर पर कमलनाथ के लिए आपका क्या संदेश होगा, क्योंकि सोची-समझी राजनीति के तहत किया जा रहा है. क्या आपको नहीं लगता कि ये बात गलत है.

इसे लेकर तपन भौमिक ने जवाब या कि ये बात गलत तो है ही साथ में ये बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है. अभी मध्यप्रदेश में लगभग 2000  मीसा बंदी हैं   मीसा बंदियों को लोकतंत्र सेनानियों का पद मध्यप्रदेश शासन ने दिया, ताम्रपत्र दिया और मीसा बंदियों को जयप्रकाश नारायण सम्मान के रूप में ये राशि दी जाती है. 

उन्होंने बोला, ''इन्होंने तुगलकी फरमान जारी किया है जो पत्र मेरे पास है. इसके अंतरगत इन्होंने कहा कि कुछ लोग इसमें गलत हैं, कुछ लोग फर्जी हैं जिनकी हम जांच कराएंगे. हमें जांच करवाने में, भौतिक सत्यापन में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन आगे इन्होंने कहा है कि जबतक भौतिक सत्यापन नहीं हो जाता है तबतक ये पेंशन बंद रहेगी.''

तपन ने कहा कि वास्तव में ये तुगलकी आदेश है इस प्रकार का आदेश ये एकदम असंसदीय है, गैरकानूनी है, असंवैधिनिक है. इन्होंने आगे ये भी नहीं कहा इस पत्र के अंतरगत कि इसकी जांच कब तक होगी, कौन करेगा, कौन सी समिति के द्वारा करवाई जाएगी. तो कुल मिलाकर ये गोल-मोल आदेश देकर के मीसा बंदियों को मिलने वाली पेंशन को बंद करने का एक षणयंत्र और तुगलकी आदेश जारी किया है.

उन्होंने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि मैं और मेरा पूरा संगठन इसके विरोध में हैं और हम इसकी निंदा करते हैं.

इसके बाद रिपब्लिक टीवी ने सवाल किया कि केवल निंदा करने से ये बात यहां खत्म नहीं होती है. कमलनाथ ने आते ही जो एक के बाद एक फैसले लिए वंदे मातरम हो, किसानों के कर्जमाफ हो और अब ये... क्या ये बीजेपी को ललकारने का तरीका है?

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इसके जवाब में उन्होंने कहा, ''निश्चित रूप से हमने सबसे पहले इसके लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, हमारे वकील के माध्यम से आज हम नोटिस जारी कर रहे हैं. परसों हाईकोर्ट में याचिका दायर हो जाएगी और साथ ही साथ कल हम मध्यप्रदेश के समस्त मीसा बंदी के प्रतिनिधियों की हम बैठक कर रहे हैं. उसके बाद दिल्ली में भी 8 तारीख को देशभर के मीसाबंदी वहां पर एकत्रित होंगे और बैठक होगी.''

तपन ने कहा कि हम इसको आंदोलन का रास्ता भी तैयार करेंगे. इस दमनकारी सरकार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. 

''निश्चित रूप से मध्यप्रदेश में ऐसे सैकड़ों मीसाबंदी हैं जिनका जीवन यापन केवल इस पेंशन की राशि से चलती है. इस पेंशन को बहाल करने के लिए कोर्ट का दरवाजा हम खटखटा रहे हैं. निश्चित रूप से मैं जानकारी के लिए ये बताना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश में मुलायम सरकार के द्वारा पेंशन दी गई. मायावती के द्वारा जैसे ही उस पेंशन को बंद किया गया. उत्तर प्रदेश में हम लोग कोर्ट में गए और इलाहाबाद कोर्ट ने मीसा बंदियों के हित में फैसला दिया.''

आगे भी जानकारी देने हुए उन्होंने बोला, ''इसी प्रकार राजस्थान में गहलोत जी ने इसको बंद करवाया. राजस्थान में भी जयपुर हाईकोर्ट से मीसा बंदियों के पक्ष में फैसला आया. और मैं समझता हूं मध्यप्रदेश में भी कोर्ट से हमारे पक्ष में बहुत जल्दी 2-4, 5 दिन में फैसला आएगा.''

इसके बाद हमने सवाल किया कि ये जो स्कीम है वो कुछ नियमों के अनुसार जारी किया गया है. ये ऐसी कोई स्कीम नहीं है जो शिवराज सिंह चौहान ने अपने मन से किया. ये एक एक्ट के तहत किया गया है लेकिन मसला ये है कि अब क्यों?

जवाब में तपन भौमिक ने कहा कि कमलनाथ जी ने ये बहुत बड़ा पाप किया है लोगों की पेंशन को रोक कर के. जहां तक संवैधानिक पक्ष है मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने विधिवत विधानसभा के अंदर बाकायदा विधेयक पास किया. उस विधेयक को पास करके बजट प्रावधान किया और उसके अनुसार इन मीसा बंदियों को राहत दिलाने का प्रयास किया. 

उन्होंने कहा, ''मीसा में कौन लोग बंद थे... भारतीय जनसंघ, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, जामायती इस्लाम के लोग, आनंद मार्ग के लोग जिनको जेल के अंदर 25 जून 1975 के रात के 12 बजे के बाद रखा गया ना कोई कानून, ना कोई दलील बड़ी संख्या में पत्रकार लोग भी जेल के अंदर रहे. आज बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है. इसके खिलाफ हम लोग सब एकजुट हो रहे हैं.''

बता दें, 29 दिसंबर को जारी एक एमपी सरकार के आदेश में कहा गया है कि अधिकारियों को पूर्व मीसा बंदियों का भौतिक सत्यापन करने के लिए निर्देशित किया गया है, और जब तक यह कवायद खत्म नहीं हो जाती, तब तक 25,000 रुपये की मासिक पेंशन का भुगतान नहीं किया जाना चाहिए. 

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