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सबरीमाला अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका पर शीघ्र सुनवाई से न्यायालय का इनकार

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

उच्चतम न्यायालय ने सबरीमला मंदिर के अधिकारियों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया . सबरीमला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश करने के बाद कथित ‘‘शुद्धिकरण’’ के लिए मंदिर को बंद करने के अधिकारियों के फैसले को लेकर वकीलों के एक समूह ने यह याचिका दायर की है .

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस के कौल की एक पीठ ने कहा कि अवमानना याचिका पर सुनवाई सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने वाले उसके फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं के साथ ही होगी .

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भारतीय युवा वकील संगठन के लिए पेश हुए अधिवक्ता पी वी दिनेश ने पीठ को बताया कि बुधवार को दो महिलाओं के प्रवेश के बाद मंदिर के अधिकारियों ने शुद्धिकरण के लिए मंदिर बंद कर दिया था जो शीर्ष अदालत के फैसले का उल्लंघन है .

गौरतलब है कि रजस्वला आयु वर्ग की दो महिलाओं ने हिंदूवादी संगठनों की तमाम धमकियों की परवाह न करते हुए बुधवार तड़के भगवान अयप्पा के सबरीमला स्थित मंदिर में प्रवेश कर सदियों पुरानी परंपरा तोड़ दी थी .

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भगवान अयप्पा के मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने वाले शीर्ष अदालत के ऐतिहासिक फैसले के तीन महीने बाद 44 वर्षीय कनकदुर्गा एवं 42 वर्षीय बिंदु ने पुलिस सुरक्षा में बुधवार को तड़के मंदिर के भीतर प्रवेश किया .

मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के बाद मुख्य पुजारी ने ‘शुद्धिकरण’ के लिए मंदिर के गर्भ गृह को बंद करने का फैसला किया था .

पिछले साल 28 सितंबर को आए उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद से ‘प्रतिबंधित’ आयु वर्ग की कई महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश की लेकिन श्रद्धालुओं तथा दक्षिणपंथी समूहों के विरोध के कारण वे प्रवेश नहीं कर पाईं .

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