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VIDEO: सबरीमला मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं के घर हुआ पथराव, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

सबरीमला में भगवान अयप्पा के मंदिर में 42 वर्ष और 44 वर्ष की उम्र की दो महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ केरल के विभिन्न हिस्सों में बुधवार को प्रदर्शन हुए . पुलिस ने यह जानकारी दी . यही नहीं दोनों महिलाओं के घर बाहर पथराव भी हुए और उनके साथ उनके घर वालों को भी धमकी मिली है.

बता दें, दोनों महिलाओं को पुलिस सुरक्षा मेें किसी अज्ञात जगह रखा है और उनके परिवार को भी सर्तक रहने के लिए कहा गया है.

वहीं दूसरी तरफ भाजपा कार्यकर्ताओं ने गुरूवयूर में एक समारोह में भाग लेने पहुंचे देवस्व ओम मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन को काले झंडे दिखाए . स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा को भी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं की नाराजगी का शिकार होना पड़ा . पार्टी की युवा शाखा ने कन्नूर में उन्हें काले झंडे दिखाए .

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया. भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्य की राजधानी में भी विरोध में मार्च निकाला . उन्होंने कासरगोड में राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित किया .

उल्लेखनीय है कि 44 वर्ष और 42 वर्ष की दो महिलाओं ने बुधवार को तड़के भगवान अयप्पा के पवित्र मंदिर में प्रवेश किया और प्रार्थना की .

उनके प्रवेश के बाद मुख्य पुजारी ने ‘शुद्धिकरण’ के लिए मंदिर के गर्भ गृह को बंद करने का निर्णय लिया. वहीं दूसरी तरफ  वरिष्ठ माकपा नेता वृंदा करात ने बुधवार को कहा कि हर महिला को केरल के सबरीमला में स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में पूजा करने का अधिकार है.

इस मामले में माकपा की पोलितब्यूरो सदस्य वृंदा ने कहा कि राज्य में एलडीएफ की सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश को लागू कर रही है.

करात ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘‘यदि कोई महिला पूजा करना चाहती है तो उसे ऐसा करने का अधिकार है.’’

माकपा नेता ने कहा, ‘‘दोनों महिलाएं पूजा करना चाहती थीं और उन्हें ऐसा करने का अधिकार दिया गया और उन्हें (केरल सरकार की ओर से) सुरक्षा प्रदान की गई .’’

सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने बुधवार को अयप्पा मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश करने का स्वागत किया और इसे ‘समानता की जीत’ करार दिया.  देसाई इस मंदिर में प्रार्थना के लिए 16 नवंबर को छह अन्य महिलाओं के साथ सबरीमला पहुंची थीं लेकिन उन्हें कोच्चि हवाई अड्डे से ही लौटा दिया गया था

पिछले साल उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मंदिर में 10 साल से 50 साल तक की उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दिये जाने के बाद भी श्रद्धालुओं और कुछ दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध के चलते इस उम्रवर्ग की महिलाएं मंदिर में नहीं जा पायीं .

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