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सिद्धार्थनाथ सिंह बोले, ओछी राजनीति कर रही हैं प्रियंका गांधी

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर प्रवासी कामगारों के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह ओछी सियासत कर रही हैं।

सिंह ने रविवार को यहां एक बयान में कहा "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस पार्टी प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। प्रियंका उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसें भेजने की बात कर रही हैं। इससे जाहिर होता है कि उन्हें वस्तुस्थिति की जानकारी ही नहीं है और वह केवल ओछी राजनीति कर रही हैं।" मंत्री का यह बयान प्रियंका गांधी की उस मांग के बाद आया है जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रवासी श्रमिकों को घर वापस लाने के लिए 1000 बसें चलाने और उनका किराया पार्टी द्वारा वहन किए जाने की इजाजत मांगी थी।

सिंह ने कहा,‘‘प्रवासी कामगार उत्तर प्रदेश से नहीं बल्कि पंजाब, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों से आ रहे हैं। इन राज्यों में या तो कांग्रेस की सरकार है या फिर उनके गठबंधन की सरकार। अगर प्रियंका को स्थिति की जानकारी होती तो वह उन राज्यों में बसें उपलब्ध कराने को कहतीं लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि वह अपने ही मुख्यमंत्रियों से यह बात नहीं कह पा रही हैं और उत्तर प्रदेश सरकार पर उंगली उठा रही हैं। यह उनकी नासमझी को जाहिर करता है।’’ मंत्री ने कहा कि योगी सरकार ने 400 रेलगाड़ियों और 11000 बसों का इंतजाम करके अन्य राज्यों से प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचवाया है।

जगौरतलब है कि प्रियंका गांधी ने शनिवार को आदित्यनाथ को लिखे पत्र में आरोप लगाया था कि सरकार की तमाम घोषणाओं के बावजूद प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित वापसी के समुचित इंतजाम नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस गाजियाबाद और नोएडा की सीमाओं पर कुल 1000 बसें चलाना चाहती है और इसका पूरा खर्च पार्टी उठाएगी।

रविवार को उन्होंने कई ट्वीट करके कहा, ‘‘ उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर बड़ी संख्या में श्रमिक मौजूद हैं। वे पैदल चल रहे हैं और आज उन्हें घंटों खड़ा रखा गया। उन्हें उत्तर प्रदेश में दाखिल नहीं होने दिया जा रहा है। वे पिछले 50 दिनों से बेरोजगार हैं। महज घोषणा और प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के नाम पर तुच्छ राजनीति करने से कुछ नहीं होगा। श्रमिकों को वापस लाने के लिए और ट्रेनें तथा बसें चलाई जानी चाहिए।’’