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CBI निदेशक वर्मा पर फैसले के लिए PM मोदी के नेतृत्व वाले पैनल की दूसरी बार बैठक

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

CBI निदेशक आलोक वर्मा के भविष्य का फैसला करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार समिति ने दूसरी बार गुरुवार को बैठक की. अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आलोक वर्मा को उनके पद पर बहाल कर दिया था. उन्हें सरकार ने करीब दो महीने पहले जबरन छुट्टी पर भेज दिया था.

समिति के अन्य सदस्यों में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस ए के सीकरी हैं. न्यायमूर्ति सीकरी देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की तरफ से उपस्थित हुए हैं.

आगे और विवरण दिए बिना अधिकारियों ने बताया कि पैनल की बुधवार को हुई बैठक बेनतीजा रही थी.

CBI चीफ वर्मा औैर विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगााए थे जिसके बाद उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया था.

आलोक वर्मा ने बुधवार को पदभार दोबारा संभालते हुए एम नागेश्वर राव द्वारा किए गए ज्यादातर तबादले रद्द कर दिए. राव वर्मा की अनुपस्थिति में अंतरिम सीबीआई प्रमुख नियुक्त किए गए थे.

बैठक के पहले, खड़गे ने कहा कि उन्होंने मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग की जांच रिपोर्ट सहित विभिन्न दस्तावेज मांगे हैं.

उन्होंने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने मामले में सीवीसी की जांच रिपोर्ट सहित कुछ दस्तावेज देने के लिए कहा है.’’

उन्होंने कहा कि वर्मा को भी कमेटी के सामने उपस्थित होने का मौका मिलना चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए.

अहम बैठक से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार पर हमला बोला और कहा कि राफेल मामले के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीबीआई प्रमुख अलोक वर्मा को हटाने की जल्दबाजी में हैं.

राहुल ने ट्वीट कर कहा, ' प्रधानमंत्री सीबीआई प्रमुख को हटाने की इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं ? उन्होंने सीबीआई प्रमुख को चयन समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति क्यों नहीं दी?'

उन्होंने कहा, 'जवाब है : राफेल।' 

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से फैसले के एक हफ्ते के अंदर ही बैठक बुलाने को कहा था.

CBI निदेशक आलोक वर्मा ने 77 दिन बाद अपना कार्यभार बुधवार को संभाल लिया. वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच की लड़ाई सार्वजनिक होने के बाद केंद्र सरकार ने अक्टूबर में आदेश जारी कर वर्मा के अधिकार वापस लेकर उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया था.

आदेश को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था जिसके बाद वर्मा ने कार्यभार संभाल लिया.

अदालत ने वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजने के केंद्र के निर्णय को रद्द कर दिया था. हालांकि वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी की जांच पूरी होने तक उन पर (वर्मा) कोई भी महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने पर रोक लगाई गई है.

वर्मा ने CBI से उन्हें हटाए जाने के फैसले को SC में चुनौती दी थी. अस्थाना ने भी कथित भ्रष्टाचार के मामले में CBI द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रूख किया है. इस संबंध में फैसला हाईकोर्ट में लंबित है.

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CBI निदेशक के तौर पर वर्मा का दो साल का निर्धारित कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म होने वाला है.

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