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स्पेक्ट्रम आवंटन में हुआ ‘घोटाला’, न्यायालय की निगरानी में हो जांच: कांग्रेस

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

कांग्रेस ने माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम के आवंटन से जुड़ी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि इस स्पेक्ट्रम के आवंटन में ‘घोटाला’ हुआ है और इसकी उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच होनी चाहिए.

पार्टी ने ये भी दावा किया कि स्पेक्ट्रम आवंटन संबंधी तय नियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत जाकर मोदी सरकार ने अपने ‘कुछ उद्योगपति मित्रों’ को फायदा पहुंचाया है. फिलहाल कांग्रेस के इस आरोप पर सरकार या भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मोदी सरकार के जाते-जाते उसके घोटाले एक के बाद एक सामने आ रहे हैं. कैग की ताजा रिपोर्ट कहती है कि माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम के आवंटन में पहले आओ, पहले पाओ की नीति का सहारा लिया गया और सरकार के कुछ उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाया गया. इससे सरकारी खजाने को 560 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.’’

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उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि उनकी सरकार में कोई घोटाला नहीं हुआ है, जबकि पिछले कुछ महीनों कई घोटाले सामने आ गए है. स्पेक्ट्रम आवंटन का घोटाला सबसे ताजा है. कैग रिपोर्ट कहती है कि स्पेक्ट्रम के लिए 101आवेदन आए थे, लेकिन नियमों और स्पेक्ट्रम नीलामी संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहवेलना करते हुए स्पेक्ट्रम आवंटित किए गए.’’

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘हमारी मांग है कि इस घोटाले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही हो सकती है.’’

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खबरों के मुताबिक कैग ने कहा है कि स्पेक्ट्रम प्रबंधन में खामियों की वजह से सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ है. उसने पाया कि एक दूरसंचार ऑपरेटर को 2015 में समिति की सिफारिशों के उलट 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर कुछ स्पेक्ट्रम का आवंटन किया गया, जबकि सरकार के पास माइक्रोवेव (एमडब्ल्यू) स्पेक्ट्रम के 101 आवेदन लंबित थे.

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