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नरसंहार पर सबसे बड़े खुलासे के बाद इंद्रेश कुमार की दो टूक, 'आंदोलन को एंटी मुस्लिम कहना गलत'

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

देश में काफी लंबे समय से धर्म, आस्था और सियासत से जुड़ा सबसे राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद का मुद्दा सबसे अहम रहा है। अयोध्या में राम जन्म भूमि पर राम मंदिर बनाने को लेकर देश के सभी गलियारों में हलचल काफी बढ़ती जा रही है। इस बीच आपके अपने चैनल रिपब्लिक भारत ने SUPER EXCLUSIVE स्टिंग ऑपरेशन के जरिए सन्न कर देने वाला खुलासा किया है।

सबसे बड़े खुलासे में अयोध्या के गोलीकांड का सबसे बड़ा सच सामने आ चुका है। रिपब्लिक भारत की SUPER EXCLUSIVE इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट में तत्कालीन SHO वीबी सिंह ने कई चौंका देने वाली बात सामने रखी। रिपब्लिक भारत के खुफिया कैमरे में कैद हुई तस्वीरों में उस वक्त के वहां तैनात पुलिस के इस अधिकारी ने बताया कि अयोध्या गोलीकांड में मारे गए कारसेवकों की लाशों को रोजाना 10 से 15 की संख्या दफनाया जाता था। 

अधिकारी की इस बात से ये पूरी तरह साफ है कि उस वक्त की मुलायम सरकार ने नरसंहार में मारे गए रामभक्तों की संख्या पर पर्दा डालने की कोशिश की। रिपब्लिक भारत के इस खुलासे से हर किसी के पैरों तले जमीन खिसक गई। एक के बाद एक प्रतिक्रिया आने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नाराजगी जताई।

अयोध्या में हुए कारसेवकों के नरसंहार पर रिपब्लिक भारत के आगाज के साथ ही इतने बड़े खुलासे को लेकर RSS नेता इंद्रेश कुमार ने सीधे तौर पर कह दिया, 'जो कारसेवकों का आंदोलन था वो ना एंटी मुस्लिम था और ना ही एंटी मस्जिद। उस आंदोलन को तत्कालीन मुलायम सरकार ने साम्प्रदायिक बनाया था।'

इंद्रेश कुमार ने नरसंहार पर सबसे बड़े खुलासे के बाद कहा कि आंदोलन को एंटी मुस्लिम कहना गलत होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि अयोध्या में जो अनेक मस्जिदें थी किसी के साथ दुर्व्यहवार नहीं हुआ। आंदोलन को एंटी मस्जिद कहना सत्य और लोकतंत्र के साथ अत्याचार था। ये आंदोलन न्याय के लिए था अत्याचार के लिए नहीं था।

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आपको बता दें, साल 1990 के दशक अयोध्या चलो के आह्वान पर अयोध्या पहुंचे लाखों कारसेवकों ने राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर अयोध्या पहुंचे थे। 30 अक्टूबर 1990 को लाखों कारसेवकों पर गोलियां चलवाकर उस वक्त मानवता का खून कर दिया गया था। 

गौरतलब है कि इससे पहले ही 25 सितंबर 1990 को बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। गोलीकांड के बाद नवंबर 1990 को आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके बाद बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।

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