Politics

राम मंदिर के लिए अध्यादेश लाए सरकार, सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर हो राम मंदिर का निर्माण: RSS

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

मुंबई के केशव सृष्टि परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक बुधवार को शुरू हुई. बैठक की शुरुआत सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी और सरकार्यवाह सुरेशजी जोशी ने छत्रपति शिवाजी महाराज तथा भारत माता के चित्र को पुष्पांजली अर्पित करके किया.

वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक प्रतिवर्ष दो बार आयोजित की जाती है. पहली मार्च में और दूसरी दीपावली के पूर्व. इस बैठक में देश भर से संघ के अखिल भारतीय, क्षेत्र तथा प्रांत के पदाधिकारी शामिल होते हैं.

राम मंदिर मुद्दे को लेकर एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यह मुद्दा न हिंदू-मुस्लिम का है और न ही मंदिर-मस्जिद के विवाद का है. बाबर के सेनापति ने जब अयोध्या में आक्रमण किया तो ऐसा नहीं था कि वहां नमाज के लिए जमीन नहीं थी. वहां खूब जमीन थी, मस्जिद बना सकते थे पर उसने आक्रमण कर मंदिर को तोड़ा था. पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाई में यह सिद्ध हो चुका है कि इस स्थान पर पहले मंदिर था.

इस्लामी विद्वानों के अनुसार भी जबरदस्ती कब्ज़ाई भूमि पर पढ़ी गई नमाज कबूल नहीं होती है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने फ़ैसले में कहा है कि नमाज के लिए मस्जिद जरुरी नहीं होती, ये कहीं भी पढ़ी जा सकती है.

राम मंदिर राष्ट्रीय स्वाभिमान और गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि जैसे सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया और भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खुद प्राणप्रतिष्ठा में गए थे. उन्होंने कहा कि इसी तरह सरकार को चाहिए कि वह मंदिर के लिए भूमि अधिग्रहीत कर उसे राम मंदिर निर्माण के लिए सौंप दे. इसके लिए सरकार कानून बनाए.

पत्रकार वार्ता में उनके साथ संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार, सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर भी उपस्थित थे. बैठक 2 नवंबर तक चलेगी. उन्होंने बताया कि इसी श्रृंखला में ये बैठक इस बार मुंबई में आयोजित की गई है, जिसमें देश भर से 350 प्रतिनिधि शामिल हुए हैं.

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि बैठक में पर्यावरण और जल संरक्षण विषय पर विशेष ध्यान देने के लिए चर्चा होगी. स्वयंसेवक समाज को साथ लेकर इन मुद्दों पर कैसे काम करें इस पर विशेष चर्चा होगी. वर्ष 1998 से ग्राम विकास गतिविधि चल रही है. इसके कारण 600 गांव में प्रत्यक्ष परिणाम देखने को मिला, इन गांवों से मिले परिणामों के आधार पर 2 हजार गांवों में विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि गौ संवर्धन गतिविधि के अंतर्गत भारतीय नस्ल की गायों का संरक्षण, गौ आधारित कृषि, गौ चिकित्सा आदि के प्रयोग चल रहे हैं. आज पूरी दुनिया में इसका महत्व बढ़ रहा है. 2010 के बाद इस दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य शुरु किया गया है. अब तक 1500 नई गौशालाएं शुरु की गई है. गौ अनुसंधान केंद्रों के माध्यम से गौमूत्र और गोबर पर प्रयोग किए जा रहे हैं.

DO NOT MISS