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नोटबंदी पर मचा सियासी घमासान, राहुल गांधी ने कहा- 'ये काला-धन सफेद करने की एक धूर्त स्कीम थी'

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

दो साल पहले आज का ही दिन था जब केंद्र की मोदी सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया था जो इतिहास के पन्नों में हमेशा- हमेशा के लिए दर्ज हो गया. दरअसल 8 नवंबर, 2016 को वर्तमान सरकार ने सबको चौकाते हुए 500 और 1000 के नोटों को चलन से बाहर करने का फैसला किया, जिसे हम दूसरे शब्दों में नोटबंदी भी कह सकते हैं. 

नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर सरकार अपनी 'उपलब्धियों' को गिना रही है. तो वहीं विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है. इसी बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है. राहुल गांधी ने नोटबंदी को एक बड़ा 'घोटाला' करार दिया है.

राहुल ने अपने ट्वीट में लिखा है कि 'नोटबंदी सोच-समझ कर किया गया एक 'क्रूर षड्यंत्र' था. ये 'घोटाला' प्रधानमंत्री के सूट-बूट वाले मित्रों का काला-धन सफेद करने की एक धूर्त स्कीम थी'.

राहुल ने इस एक कांड बताते हुए कहा कि 'इस कांड में कुछ भी मासूम नहीं था. इसका कोई भी दूसरा अर्थ निकालना राष्ट्र की समझ का अपमान है'

जाहिर है, चुनाव नजदीक है और विपक्षी दलों के लिए नोटबंदी एक बड़ा मुद्दा है. ऐसे में इस मुद्दे को भुनाने के लिए ये वक्त उनके लिए सबसे सटीक है. कांग्रेस की तरफ से लगातार ये कहा जा रहा है कि मोदी सरकार के इस बड़े फैसले से अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है. इसके साथ ही कांग्रेस ने नोटबंदी के कारण आम लोगों को हुई परेशानी का भी जिक्र करते हुए NDA पर सवाल उठाए हैं.  

राहुल गांधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि, 'नोटबंदी से जीडीपी में गिरावट आई, उसके और भी असर देखे जा रहे हैं. छोटे और मंझोले कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं जिसे नोटबंदी ने पूरी तरह से तोड़ दिया. अर्थव्यवस्था लगातार जूझती दिखाई पड़ रही है जिसका बुरा असर रोजगार पर पड़ रहा है. युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं. बुनियादी ढांचे के लिए दिए जाने वाले कर्ज और बैंकों की गैर-वित्तीय सेवाओं पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है'.

वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर मोदी सरकार के इस कदम पर सवाल खड़ा किया और जमकर निशाना साधा. केजरीवाल ने कहा कि 'देश की अर्थव्यवस्था के लिए नोटबंदी एक ‘‘गहरा आघात’’ करार है.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्त रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, 'नोटबंदी आज़ादी के बाद सबसे बड़ा घोटाला है. नोटबंदी से कालाधन रखने वालों की हुई ऐश, रातों रात ‘सफेद’ बनाया सारा कैश! न काला धन मिला, ना नक़ली नोट पकड़े गए, ना ही आतंकवाद व नक्सलवाद पर लगाम लगी'.

उन्होंने कहा, '120 लोग मारे गए, अर्थव्यवस्था को 3 लाख करोड़ का नुकसान, लाखों लोगों की नौकरियां छिन गई. मोदी जी, देशवासियों को अब तक ‘अर्थव्यवस्था तहस-नहस दिवस’ यानी नोटबंदी की दूसरी बरसी की बधाई नहीं दी? कोई विज्ञापन भी नहीं? आप भूल गए होंगे लेकिन देशवासियों को याद है. तैयार रहिए, पश्चात्ताप का समय अब दूर नहीं'.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी नोटबंदी के कदम को ‘‘विपदा’’ करार दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले जब इसका ऐलान किया था वो तभी से इसे ''काला दिन'' कहती आ रही हैं .

इन सभी के बीच देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्षी पार्टियों पर पलटवार करते हुए कहा कि नोटबंदी से औपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार हुआ और कर आधार भी बढ़ा. इससे सरकार के पास गरीबों के हित में काम करने और बुनियादी ढांचे का विकास करने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हुए.

अरूण जेटली ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत में नोटबंदी के बाद से डिजिटल ट्रांजैक्सन में वृद्धि हुई है. 

गौरतलब है कि 2 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016  को रात 8 बजे दूरदर्शन के जरिए देश को संबोधित करते हुए 500 और 1000 के नोट बंद करने का ऐलान किया था.  नोटबंदी की यह घोषणा उसी दिन आधी रात से लागू हो गई थी. इससे कुछ दिन देश में अफरातफरी का माहौल रहा और बैंकों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं. बाद में 500 और 2000 के नये नोट जारी किए गए थे. 

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