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EXCLUSIVE: राहुल गांधी के उत्तराधिकारी के तौर पर नेतृत्व संभालने के लिए प्रियंका वाड्रा ने रची सीक्रेट साजिश

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

लोकसभा चुनाव 2019 में मिली करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस पद से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस करीब दो महीने बाद भी राहुल गांधी का विकल्प नहीं तलाश पाई है। इन सबके बीच प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद पर विरजामान होने के लिए सीक्रेट प्लान तैयार कर चुकी है। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए खुद को आगे बढ़ाने के लिए प्रियंका गांधी ओवरटाइम काम भी कर रहीं हैं। 

भरोसमंद सूत्रों के अनुसार, इस्तीफे के बाद राहुल गांधी ने एक लकीर खिंची कि कांग्रेस का नया अध्यक्ष 'गांधी परिवार' के बाहर का ही होगा। इससे प्रियंका गांधी नाराज हो गई थी। हालांकि सार्वजनिक तौर पर प्रियंका इसका विरोध नहीं कर सकती  है, इसलिए उन्होंने अपने खास राजदार और गांधी परिवार के वफादार राजीव शुक्ला को सीक्रेट मिशन चलाने का प्रभार सौंपा ताकि वह कांग्रेस अध्यक्ष पद पर क़ाबिज़ हो सके।

बता दें राजीव शुक्ला जो उत्तर प्रदेश के कानपुर से हैं। ऐसे में कानपुर से ही सांसद रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने प्रियंका गांधी को पार्टी का अध्यक्ष बनाने की मांग शुरू कर दी है। इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी से पूर्व सांसद अभिजीत मुखर्जी , वरिष्ठ नेता अनिल शास्त्री जैसे तमाम नेताओं ने प्रियंका गांधी को पार्टी का अध्यक्ष बनाने की जोरदार वकालत की। इन नेताओं का मानना है  कि प्रियंका गांधी वाड्रा को राजनीति का अच्छा अनुभव हो गया है, इसके साथ ही पार्टी के अच्छे नेताओं की टीम भी उनके साथ है। ऐसे में अब उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने में कोई हर्ज नहीं है। 

वहीं इसके पीछे एक और मास्टरमाइंड है जो पर्दे के पीछे वाड्रा को सलाह दे रहे हैं, वह प्रशांत किशोर हैं। सूत्रों के अनुसार प्रशांत किशोर जेडीयू से ताल्लुक रखते हैं और उनका भाजपा के साथ आधिकारिक गठबंधन है। जिस वजह से वह खुल कर बाहर नहीं आ सकते है।  लेकिन सूत्रों का कहना कि वह भी प्रियंका गांधी के लिए रणनीति बनाने में महत्वपुर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 

यही वजह है कि एक सोची समझी रणनीति के तहत प्रियंका ने खुद ट्वीट करके अपने राजनीति में होने की बात कही। प्रियंका गांधी ने नेल्सन मंडेला के मृत्यु के 6 साल बाद एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट कर कहा कि, 'मंडेला ने कहा था कि मुझे राजनीति में होना चाहिए। दुनिया को नेल्सन मंडेला जैसे व्यक्तियों की कमी आज पहले से ज्यादा महसूस होती है। उनका जीवन सत्य, प्रेम और आजादी की मिसाल है।' इसके जरिए प्रियंका साफ तौर पर कहना चाहती हैं कि उनकी राजनीतिक क्षमता नेल्सन मंडेला 2001 में पहचान गए थे । 

दिलचस्प बात यह है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले वेस्ट यूपी की कमान संभालने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस को खड़ा करने में सफल नहीं हो सकी। ऐसे में चुनाव के नतीजे आने क बाद हार की जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत प्रदेश अध्यक्ष और कई नेताओं ने अपने - अपने पदों से से इस्तीफा दे दिया । इतना ही नहीं प्रियंका गांधी के साथ बनाए गए महासचिव और पश्चिम यूपी के प्रभारी रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपना पद नहीं छोड़ा। जबकि प्रियंका ने प्रभार वाले वेस्ट यूपी में कांग्रेस को महज एक सीट मिली थी, बाकी सिटों पर पार्टी नेताओं की जमानत जब्त हो गई थी। इसके बावजूद कांग्रेस को मिली करारी हार का जिम्मेदार कांग्रेस के सीनियर नेताओं को माना गया।  

इससे तो यह तय है कि प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस के नुकसान को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को प्रोजेक्ट करने के एक अवसर के रूप में देखती हैं। इसलिए प्रियंका गांधी ने अब कांग्रेस पार्टी के भीतर ही एक मजबूत चाल चल रही है ताकि उन्हें कांग्रेस पार्टी के अगले उत्तराधिकारी के तौर पर स्वीकार्य कर लिया जाए।

नाम ना छापने की शर्त पर रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क से बता करते हुए कांग्रेस पार्टी के सूत्रों ने कहा कि प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी को बाहर करने के लिए 2019 के चुनाव को अपनी चाल के रूप में देखा , लेकिन प्रियंका को वेस्ट यूपी में अपने इतने खराब प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी।  प्रियंका गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान भीड़ या सार्वजनिक समर्थन जुटाने में असमर्थ थीं। उनके भाषणें को अल्पज्ञ तौर पर देखा जाता था और मतदाताओं से बात करते समय उनका अंदाज उनकी पार्टी को महंगा पड़ गया।

इन सब के बिच प्रियंका गांधी ने सावधनीपूर्वक खुद पर से ध्यान हटाने के लिए साजिश रची और सीडब्ल्यूसी की बैठक में राहुल गांधी के साथ रोती नजर आई और इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के सभी नेताओं को गांधी परिवार से अलग साबित किया। इस दौरान उन्होंने राजीव शुक्ला के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की, जिन्होंने उन्हें अपना अभियान शुरू करने से पहले एक महीने तक प्रतीक्षा करने की सलाह दी। 

वहीं राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया नई पीढ़ी के नेतृत्व के चेहरे के तौर पर अध्यक्ष पद के संभावितों में गिने जा रहे हैं। ऐसे में प्रियंका गांधी वाड्रा के लॉबी ने अपने अभियान को आगे बढ़ाने का फैसला किया। प्रियंका तब घबरा गईं जब पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह सचिन पायलट का समर्थन करेंगे या ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 6 जुलाई को कहा कि युवा नेता होने की जरूरत है।

दिलचस्प बात यह है कि इसके एक सप्ताह के भीतर ही प्रियंका के लिए योजना शुरू की गई थी। उनके पार्टी अध्यक्ष बनने के अभियान के पीछे का विचार यह है कि गांधी की जगह गांधी ही उत्तराधिकारी बने। और जहां तक सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया का सवाल है तो वह पार्टी के परंपरा को ध्यान मे रखते हुए प्रियंका का ही समर्थन करेंगे। 

बता दें कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में कम से कम आठ नेता शामिल हैं। इसमें पार्टी की पुरानी और नई दोनों पीढ़ी के नेता शामिल हैं। खास बात यह है कि कांग्रेस के नये अध्यक्ष के दावेदारों में दलित समुदाय के चार वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, सुशील कुमार शिंदे, मीरा कुमार और मुकुल वासनिक शामिल हैं। वहीं युवा चेहरों की बात करें तो प्रियंका गांधी , मिलिंद देवड़ा समेत राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया नई पीढ़ी के नेतृत्व के चेहरे के तौर पर अध्यक्ष पद के संभावितों में गिने जा रहे हैं।

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