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आलोक वर्मा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अरुण जेटली ने कहा, ''इसको राजनीति के चश्मे से नहीं देखना चाहिए''

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

CBI के निदेशक आलोक कुमार वर्मा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया और उनको छुट्टी पर भेजने का केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का आदेश रद्द कर दिया है. इसे लेकर केंद्र सरकार की तरफ से अरुण जेटली ने पहली प्रतिक्रिया दी है. 

कांग्रेस पार्टी और विरोधी खेमा इस फैसले को सरकार की हार करार दे रही है. इसपर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि ये एक संस्थागत फैसला है. इसे राजनीति के चश्मे से नहीं देखना चाहिए. 

जेटली ने कहा, ''आज सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, सीबीआई डायरेक्टर ने जो याचिका डाली थी उसके उपर आया है. सरकार ने सीबीआई, उसकी विश्वसनीयता, उसकी स्वायित्तता और उसकी प्रतिष्ठा को मद्देनज़र रखते हुए ये निर्णय लिया था कि जब सीबीआई के दो बड़े अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप लगा रहे हैं. तो जो सीवीसी का रिकमेंडेशन आया था कि जब तक उन आरोपों की जांच ना हो तब तक ये दोनों अपने आप को रेक्यूस करें और लीव पर जाएं.''

उन्होंने कहा कि ये सरकार ने ईमानदारी से निर्णय लिया था. सीबीआई का जो कानून  है. उसमें दो प्रावधान है. एक प्रावधान है कि भ्रष्टाचार के साथ संबंधित मामलों में जो सुप्रिटेंडेंस का अधिकार है वो सीवीसी को है. और दूसरा प्रावधान है कि सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति, उसको हटाना या उसको ट्रांसफर करने का अधिकार एक विशेष समिति को है जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष होते हैं. 

जेटली ने बता कि जजमेंट तो हम लोगों ने पूरी पढ़ी नहीं है लेकिन ये संभव है कि कोर्ट ने ये कहा हो कि दोनों को अगर इकट्ठा पढ़ा जाए तो अगर ऐसा सुप्रिटेंडेंस का पावर होता है जिसमें सीबीआई का डायरेक्टर अपने अधिकार से कुछ समय के लिए भी वंचित होता है तो वो कमेटी के सामने जाता है. इस व्यूज से भी अगर सीबीआई की एक संस्था के नाम पर स्वायित्तता और निष्पक्षता और विश्वसनीयता बढ़ती है तो ये स्वागतनीय है. 

''लेकिन इसके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने एक अकाउंटबिलिटी का जवाबदेवी का भी मैकेनिजम सेट-अप किया है. जिसके तहत कहा है कि जितने भी ये तथ्य आए हैं इस केस में एक सप्ताह के भीतर सरकार उस कमेटी की मीटिंग बुलाए जो उसके सामने जाएंगे. तो ये एक दोनों को बैलेंस करने करके सुप्रीम कोर्ट ने व्यू लिया है. जब जजमेंट की डीटेल आएगी सरकार उसका अध्ययन करेगी. और उसी हिसाब से सरकार अपनी अगली कार्रवाई करेगी.''

उन्होंने कहा कि सरकार का किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष में रवैया नहीं है सरकार ये चाहती है कि सीबीआई की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे. और जब दो बड़े अधिकारियों के बीच में आरोप प्रत्यारोप थे तो सरकार ने उसी ईमानदारी की नीयत के साथ सीवीसी की रिकमंडेशन को स्वीकार किया था. 

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे इंस्टीट्यूशनल प्रोटेक्शन की दृष्टिकोण से किया है इसे राजनीति के चश्मे से नहीं देखना चाहिए.

बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी जांच पूरी होने तक आलोक वर्मा पर कोई भी बड़ा निर्णय लेने पर रोक लगाई. साथ ही कोर्ट ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद पर बहाल कर दिया है.

गौरतलब है कि आलोक कुमार वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. जिसके बाद सरकार ने दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेज दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में एम नागेश्वर राव की सीबीआई के अंतरिम प्रमुख के तौर पर नियुक्ति रद्द कर दी है.

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सरकार के इस कदम के खिलाफ आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने 6 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. हालांकि, मंगलवार को चीफ जस्टिस छुट्टी पर थे ऐसे में फैसला जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच ने सुनाया है.

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