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राफेल विवाद: निर्मला सीतारमण ने साधा राहुल गांधी पर निशाना, कहा- वह एक भ्रमित’ व्यक्ति हैं

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को राफेल करार पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बयानों को लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि वह एक ‘भ्रमित’ व्यक्ति हैं, क्योंकि वह अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग बातें कहते हैं.

राफेल करार के मुद्दे पर राहुल के बयानों के बारे में पत्रकारों की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में सीतारमण ने यह टिप्पणी की. राहुल ने कहा है कि राफेल करार दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कारोबारी अनिल अंबानी के बीच हुआ.

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ''आप भ्रमित न हों...राहुल गांधी भ्रमित व्यक्ति हैं. वह अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग दरों की बात करते हैं. इसके अलावा, वह अलग-अलग जगहों पर कहते रहे हैं कि हमने (सरकार ने) कई लोगों की मदद की है.. कभी वह अडाणी का नाम लेते हैं तो कभी अंबानी का''

बता दें, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने हाल ही में प्रधानमंत्री और अनिल अंबानी पर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को आरोप लगाया है कि दसॉल्ट एविएशन ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को ‘‘रिश्वत की पहली किस्त’’ के रूप में 284 करोड़ रुपए दिए और दावा किया कि राफेल सौदे में जांच होने पर कार्रवाई के डर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘‘रातों की नींद उड़’’ गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को इसलिए हटाया गया क्योंकि वह राफेल सौदे की जांच करना चाहते थे.

राहुल गांधी ने अपने आरोपों की पुष्टि के लिए कोई सबूत या दस्तावेज नहीं दिए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कहा था कि ऑफसेट ठेका हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेल (एचएएल) के बजाए अंबानी की कंपनी को इसलिए दिया क्योंकि उसके पास जमीन थी. उन्होंने आरोप लगाया कि अंबानी की कंपनी ने दसॉल्ट से मिले धन से जमीन खरीदी.

राहुल गांधी ने कहा है कि ‘‘दसॉल्ट ने घाटे में चल रही एक कंपनी को 284 करोड़ रुपए दिए, जिसका मूल्यांकन महज 8.3 लाख रुपए था. यह अनिल अंबानी को दी गई रिश्वत की पहली किस्त थी.’ राहुल गांधी ने कहा, ‘‘राफेल बिलकुल स्पष्ट मामला है और इसमें सिर्फ एक व्यक्ति ने भ्रष्टाचार किया है.’’ 

वहीं उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र से कहा था कि वह फ्रांस से खरीदे जा रहे 36 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत की जानकारी उसे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में सौंपे. साथ ही इसपर सहमति जताई कि ‘‘सामरिक और गोपनीय’’ सूचनाओं को सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है.

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