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विपक्ष की महारैली से बोले यशवंत सिन्हा- आंकड़ों के साथ ‘बाजीगरी’ कर रही है मोदी सरकार

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

कभी भाजपा का हिस्सा रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने शनिवार को केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी के बाद यह पहली सरकार है जो विकास के आंकड़ों के साथ ‘बाजीगरी’ कर रही है .

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा यहां आयोजित विपक्ष की रैली को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि मौजूदा शासन में अगर आप सरकार की तारीफ करते हैं तो वह ‘देश भक्ति’ है और अगर आलोचना करते हैं तो वह ‘देश द्रोह’ है .

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केन्द्रीय वित्त मंत्री रहे सिन्हा ने कहा, ‘‘आजादी के बाद यह पहली सरकार है जो जनता को मूर्ख बनाने के लिए विकास के झूठे और मनगढ़ंत आंकड़े पेश कर रही है .’’ 

कश्मीर समस्या का हल निकालने के लिए गठित समिति में शामिल रहे सिन्हा ने कहा कि जब उन्होंने प्यार-मोहब्बत वाले वातावरण में सभी तबके के लोगों से बात करने का सुझाव दिया था तो उन्हें ‘‘पकिस्तानी एजेंट’’ बताया गया था .

यहां तक कि मंच से उन्होंने नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला से सवाल किया, ‘‘क्या मैंने गलत कहा था?’’ इस पर अब्दुल्ला ने ‘ना’ में सिर हिलाया .

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने नरेन्द्र मोदी सरकार के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास’ का भी मजाक बनाया . उन्होंने इसे ‘सबका साथ, सबका विनाश’ बताया . 

जिगनेश मेवानी ने भी बोला हमला

इससे पहले दलित नेता जिगनेश मेवानी ने शनिवार को कहा कि तृणमूल कांग्रेस की विपक्षी रैली में कई विपक्षी दलों का एकसाथ आना आगामी लोकसभा चुनाव में बदलाव का संदेश देता है .

‘ब्रिगेड परेड ग्राउंड’ में विपक्ष की महारैली को संबोधित करते हुए मेवानी ने कहा कि ‘महागठबंधन’ आरएसएस और भाजपा की हार सुनिश्चित करेगा . गुजरात से निर्दलीय विधायक ने कहा, ‘‘भाजपा के साढ़े चार साल के शासन में गरीबों, अल्पसंख्यकों और दलितों के शोषण से देश अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है .’’ 

उन्होंने उम्मीद जतायी कि केन्द्र में ‘महागठबंधन’ की सरकार बनने पर वह संविधान के पालन को सुनिश्चित करेगा और देश एक सच्चा समाजवादी गणराज्य बन जाएगा .

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ महारैली में बीजू जनता दल (बीजद) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वाम मोर्चे के अलावा सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं के महारैली में हिस्सा लेने की संभावना है .