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राम मंदिर मामले में मोदी सरकार ने हिंदुओं का विश्वास तोड़ा है : प्रवीण तोगडिया

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

अतंरराष्ट्रीय हिंदू परिषद् के अध्यक्ष प्रवीण तोगडिया ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने राम मंदिर मामले में देश के हिन्दुओं का विश्वास तोड़ा है. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही केंद्र सरकार ने किसानों और युवाओं के साथ भी छलावा किया है.

जयपुर में संवाददाताओं से बातचीत में तोगडिया ने कहा, 'मोदी जी मंदिर नहीं बना सकते हैं तो इस्तीफा दे दें. हमें तो देश में राम, किसानों को फसलों का दाम और युवाओं को काम देने वाली सरकार चाहिए थी इसलिये लोगों ने वोट दिया था. देश को न तो राम मिले, न किसानों को दाम मिला और न ही युवाओं को काम मिला.'

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आज कहा कि देश में नई शिक्षा नीति तैयार है. आरएसएस सरकार से शिक्षा नीति तैयार करवा सकती है तो साढे चार वर्षों में आरएसएस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से राम मंदिर कानून क्यों नहीं बनवाया.

उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साढे चार वर्षो के शासन में 52 हजार किसानों ने आत्महत्याएं की और किसानों पर 12 लाख करोड़ का कर्ज है. इसे दूर क्यों नहीं किया गया.

उन्होंने कहा केन्द्र में बहुमत की सरकार होने बावजूद किये गये वादों को पूरा नहीं करने के लिए भाजपा को देश से माफी मांगनी चाहिए. तोगडिया ने बताया कि उनकी राजनैतिक पार्टी की लांचिग फरवरी के प्रथम सप्ताह में दिल्ली में होगी.

कल होगी अहम सुनवाई

राम जन्मभूमि को लेकर सालों पुराना पनपा विवाद का समाधान आखिर कब होगा? ये सवाल हर किसी के ज़हन में है. इस बीच शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में दायर अपीलों पर सुनवाई करेगा.

ये मामला मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है.

इस पीठ द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय न्यायाधीशों की पीठ गठित किये जाने की उम्मीद है.

उच्च न्यायालय ने इस विवाद में दायर चार दीवानी वाद पर अपने फैसले में 2.77 एकड़ भूमि का सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच समान रूप से बंटवारा करने का आदेश दिया था.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 29 अक्टूबर को कहा था कि ये मामला जनवरी के प्रथम सप्ताह में उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होगा जो इसकी सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित करेगी.

बाद में अखिल भारत हिन्दू महासभा ने एक अर्जी दायर कर सुनवाई की तारीख पहले करने का अनुरोध किया था लेकिन कोर्ट ने ऐसा करने से इंकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि 29 अक्टूबर को ही इस मामले की सुनवाई के बारे में आदेश पारित किया जा चुका है.

हिन्दू महासभा इस मामले में मूल वादकारियों में से एक एम सिद्दीक के वारिसों द्वारा दायर अपील में एक प्रतिवादी है.

 

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