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नकवी ने किया प्रियंका गांधी पर पलटवार, कहा - ''BJP राष्ट्रीय हितों और संवैधानिक मूल्यों को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध''

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया को ‘‘अज्ञानता’’ का परिचायक करार देते हुए कहा कि भाजपा एवं अन्य राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय हितों एवं संवैधानिक मूल्यों को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं ।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को ‘‘आरक्षण पर सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा’’ से जुड़ी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की कथित टिप्पणी और बाद में उस पर संघ की सफाई की पृष्ठभूमि में तंज कसा था ।

इस पर नकवी ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस आज भी अपनी पिटी हुई पटकथा पर राजनीतिक दिखावे का प्रयास किए जा रही है । जम्मू कश्मीर, लद्दाख के लोगों का चैन कुछ लोगों के मन में बेचैनी पैदा कर रहा है ।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का पीवीआर :प्रियंका..वाड्रा..राहुल: शो पूरी तरह से फेल हो चुका है । उसे ऐसी बयानबाजी छोड़कर राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक सोच का परिचय देना चाहिए ।

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘ भाजपा और अन्य राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय हितों और संवैधानिक मूल्यों को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं । हमें अज्ञानियों से ज्ञान लेने की जरूरत नहीं है । ’’ गौरतलब है कि प्रियंका ने ट्वीट कर कहा था, ‘‘तो आरआरएस ने घोषणा कर दी है कि समाज में सभी मुद्दों का समाधान सौहार्दपूर्ण संवाद के माध्यम से होना चाहिए?’’ मुझे लगता है कि या तो मोदी जी और उनकी सरकार आरएसएस के विचारों का सम्मान नहीं करते या फिर या फिर यह नहीं मानते हैं कि जम्मू-कश्मीर में कोई मुद्दा है।'’ लाल किले से प्रधानमंत्री की जनसंख्या नियंत्रण संबंधी टिप्पणी पर एक सवाल के जवाब में नकवी ने कहा कि कोई भी तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था और तेजी से तरक्की करने वाला देश जनसंख्या विस्फोट को बर्दाश्त नहीं कर सकता ।

उन्होंने कहा ‘‘जनसंख्या पर राष्ट्रीय बहस और जागरूकता की जरूरत है । लेकिन कुछ लोगों की गंदी सोच हर सामाजिक सुधार के मुद्दे पर साम्प्रदायिक तड़का लगाने की आदी हो गई है । ’’ अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण शुद्ध रूप से राष्ट्रीय हित एवं सामाजिक हित से जुड़ा विषय है । इसे धर्म, जाति, सम्प्रदाय की नजर से देखने वाले लोग संकीर्ण मानसिकता से बाहर आएं।


 

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