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JNU देशद्रोह मामले में कार्रवाई के बाद तिलमिलाईं महबूबा मुफ्ती, चार्जशीट को बताया 'फर्जी'

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

देश की राजनीति का तापमान एक बार फिर हाई हो गया है. सोमवार को कुछ ऐसा हुआ जो टुकड़े-टुकड़े गैंग के लिए किसी बड़े झटके से कतई कम नहीं था. दिल्ली पुलिस ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में देश विरोधी नारेबाजी के मामले में चार्जशीट दाखिल कर ली. 1200 पन्नों की इस चार्जशीट में कन्हैया कुमार, उमर खालिद, शेहला रशीद के अलावा अन्य को आरोपी बनाया गया है. 

इसे देखते हुए सियासी सरगर्मी अचानक से काफी तेज हो गई. कोई इसे जीत करार दे रहा है तो कोई इसे लेकर सरकार पर ये आरोप मढ़ रहा है कि वो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले ये केंद्र सरकार का राजनीतिक स्टंट है. इस बीच जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बीजेपी की साथी रही पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इसे वोट की राजनीति करार दिया है. 

इस मसले को लेकर बयानबाजी का सिलसिला बादस्तूर जारी है. बयानबाजी के बीच पीडीपी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती ने इस दौरान कुछ ऐसा बोल दिया जिससे कई सवाल खड़े होने लाज़मी हैं. उन्होंने अफज़ल गुरू की फांसी तक को अपने सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया.

मुफ्ती ने कहा, ''2014 के इलेक्शन से पहले इसी तरह कांग्रेस ने अफज़ल गुरू को फांसी दी थी ये सोचकर कि शायद इस तरह से उनको कामयाबी मिलेगी. आज बीजेपी वही दोहरा रही है. आज उन्होंने एक तो कन्हैया, उमर खालिद, उनके अलावा जम्मू-कश्मीर के 7-8 स्टूडेंट के खिलाफ चार्जशीट किया है. जो कि (JNU सेडिशन केस में चार्जशीट) बिल्कुल गलत है. ऐसा महसूस हो रहा है कि 2019 के इलेक्शन की तैयार में जम्मू-कश्मीर के लोगों को फिर से मोहरा बनाया जा रहा है. उनको इस्तेमाल किया जा रहा है. वोट की राजनीति हो रही है.''

गौरतलब है कि 9 फरवरी 2016 को आतंकी अफजल गुरु की बरसी पर दिल्ली के JNU में नारेबाजी हुई थी. जिसके बाद काफी दिनों तक इस मामले ने तूल पकड़ रखा था. चार्जशीट दायर होने के बाद कन्हैया कुमार ने मीडिया के सामने आकर केंद्र सरकार के खिलाफ खूब तंज कसा...

कन्हैया कुमार ने मीडिया से कहा, ‘‘आरोपपत्र राजनीति से प्रेरित है. हालांकि, हम चाहते हैं कि आरोप तय किए जाएं और इस मामले में त्वरित सुनवाई हो ताकि सच्चाई सामने आ सके. हम उन वीडियो को भी देखना चाहते हैं जो पुलिस द्वारा सबूत के तौर पर रखे गए हैं.’’ 

क्या था मामला?

आज से तकरीबन तीन साल पहले 9 फरवरी 2016 को, JNU परिसर में अफजल गुरु और मकबूल भट की फांसी के खिलाफ गुस्सा दिखाने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए थे. इस संबंध में एक मामला वसंत कुंज (उत्तर) पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है, बाद में यह मामला दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल को ट्रांसफर कर दिया गया था. इस मामले में  कन्हैया कुमार और अन्य को गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गई थी. 

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महबूबा मुफ्ती ने इस बयान के जरिए केंद्र सरकार तो निशाना साधा ही है. लेकिन उनके बयान में अफज़ल गुरू का हवाला देकर निशाना साधना किसी के गले से उतरना आसान नहीं होगा.

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