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मायावती का राहुल पर बड़ा हमला, 'कश्मीर जाने से पहले करना चाहिए था विचार, 370 के पक्ष में नहीं थे अंबेडकर'

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद से लगातार सरकार और विपक्षी दलों में जुबानी जंग लगातार जारी है। बीते हफ्ते कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता का कश्मीर दौरा के बाद से ही पक्ष- विपक्ष में लगातार राजनीतिक प्रतिक्रिया का दौर जारी है। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने कश्मीर मुद्दे पर कांग्रेस के रूख की तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गाधी को आड़े हाथों लिया है। 

मायावती ने इशारों में पूर्व कांग्रेसी अध्यक्ष के कश्मीर जाने के फैसले को 'गलत' ठहराया है। मायावती ने यह कहते हुए विपक्षी नेताओं की आलोचना कि उनका ये कदम केंद्र और जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को राजनीति करने का मौका दे रहा है। 

मायावती ने तड़के सोमवार को अपने अधिकारिक ट्विटर हैडल से एक के बाद एक ट्वीट करते हुए कश्मीर मुद्दे पर अपना पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि जैसाकि विदित है कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर हमेशा ही देश की समानता, एकता व अखण्डता के पक्षधर रहे हैं इसलिए वे जम्मू-कश्मीर राज्य में अलग से धारा 370 का प्रावधान करने के कतई भी पक्ष में नहीं थे। इसी खास वजह से बीएसपी ने संसद में इस धारा को हटाये जाने का समर्थन किया।

बसपा सुप्रीमो ने आगे कहा कि लेकिन देश में संविधान लागू होने के लगभग 69 वर्षों के उपरान्त इस धारा 370 की समाप्ति के बाद अब वहाँ पर हालात सामान्य होने में थोड़ा समय अवश्य ही लगेगा। इसका थोड़ा इंतजार किया जाए तो बेहतर है, जिसको माननीय कोर्ट ने भी माना है।

विपक्ष के नेताओं के फैसले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे में अभी हाल ही में बिना अनुमति के कांग्रेस व अन्य पार्टियों के नेताओं का कश्मीर जाना क्या केन्द्र व वहां के गवर्नर को राजनीति करने का मौका देने जैसा इनका यह कदम नहीं है? वहाँ पर जाने से पहले इस पर भी थोड़ा विचार कर लिया जाता, तो यह उचित होता।

बता दें, अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के बाद कश्मीर घाटी की स्थिति का जायजा लेने के लिए दिल्ली से पहुंचे विपक्षी दलों के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को प्रशासन ने शनिवार को श्रीनगर हवाई अड्डे से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी थी।

प्रतिनिधिमंडल में आठ राजनीतिक दलों - कांग्रेस, माकपा, भाकपा, द्रमुक, राकांपा, जद (एस), राजद और टीएमसी के प्रतिनिधि शामिल थे।

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