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आडवाणी पर राहुल की आपत्तिजनक टिप्पणी पर भड़की सुषमा, 'वो हमारे पिता तुल्य, भाषा की मर्यादा बनाए रखें'

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए भाजपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल और वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की आपत्तिजनक टिप्पणी पर अब विवाद गहरा गया है। बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता सुषमा स्वराज ने राहुल गांधी के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए उनसे भाषा पर संयम रखने की अपील की।

सुषमा ने शनिवार को अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में ट्वीट करते हुए लिखा कि राहुल जी - अडवाणी जी हमारे पिता तुल्य हैं. आपके बयान ने हमें बहुत आहत किया है. कृपया भाषा की मर्यादा रखने की कोशिश करें।

बता दें, महाराष्ट्र के चंद्रापुर में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा था, ‘‘भाजपा हिंदुत्व की बात करती है। हिंदुत्व में गुरु सर्वोच्च होता है। वह गुरु शिष्य परंपरा की बात करती है। मोदी के गुरु कौन हैं? आडवाणी हैं। मोदी ने आडवाणी को  जूता मारके स्टेज से उतारा।’’


राहुल ने आगे मोदी पर पार्टी के बुजुर्गों का अपमना करते हुए कहा था, 'पीएम मोदी हिंदू धर्म की बात करते हैं, लेकिन हिंदू धर्म में सबसे जरूरी होता है गुरु और पीएम मोदी अपने गुरु आडवाणी के सामने हाथ तक नहीं जोड़ते, स्टेज से उठाकर फेंक दिया गुरु को, .... मारकर स्टेज से उतारा है आडवाणी जी को और फिर हिंदू धर्म की बात करते हैं।' 

बता दें आडवाणी के प्रति किए गए व्यवहार के बाद गुरुवार को आए लालकृष्ण आडवाणी के ब्लॉग को लेकर राहुल ने मोदी पर यह तंज कसा है। दरअसल, आडवाणी ने अपने ब्लॉग में कहा है कि भाजपा ने अपने राजनीतिक विरोधियों को कभी राष्ट्र विरोधी नहीं माना। इसपर सवाल करते हुए राहुल ने कहा कि हिंदू धर्म में कहां लिखा है कि लोगों को मारना चाहिए और हिंसा करनी चाहिए।

लालकृष्ण अडवाणी को इस बार लोकसभा चुनाव में पार्टी ने टिकट नहीं दिया है और उनकी पारंपरिक गांधीगनर सीट से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह चुनाव लड़ रहे हैं ।  अडवाणी ने 1991 से छह बार लोकसभा में निर्वाचित करने के लिए गांधीनगर के मतदाताओं के प्रति आभार प्रकट किया । वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी के भीतर वृहद राष्ट्रीय परिदृश्य में लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा भाजपा की विशिष्टता रही है । इसलिए भाजपा हमेशा मीडिया समेत सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और उनकी मजबूती को बनाए रखने की मांग में सबसे आगे रही है ।

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