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VIDEO: चार्जशीट दाखिल होने के बाद मीडिया के सामने आए कन्हैया ने मोदी सरकार पर ये टिप्पणी की

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में देश विरोधी नारेबाजी के मामले में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर ली है. 1200 पन्नों की इस चार्जशीट में कन्हैया कुमार, उमर खालिद, शेहला रशीद के अलावा अन्य को आरोपी बनाया गया है. 

गौरतलब है कि 9 फरवरी 2016 को आतंकी अफजल गुरु की बरसी पर दिल्ली के JNU में नारेबाजी हुई थी. जिसके बाद काफी दिनों तक इस मामले ने तूल पकड़ रखा था. चार्जशीट दायर होने के बाद कन्हैया कुमार ने मीडिया के सामने आकर केंद्र सरकार के खिलाफ खूब तंज कसा...

कन्हैया ने ये कहा..

''इस बात को यदि हम मान लेते हैं कि चार्जशीट हुआ है तो हम बधाई देना चाहते हैं. दिल्ली पुलिस को.. और धन्यवाद देना चाहते हैं मोदीजी को कि चार्जशीट हुआ है कम से कम... 

चार्जशीटेड हम हो गए हैं, देश में बहुत सारे लोग चार्जशीटेड हैं. लेकिन इसमें दिक्कत की बात ये है कि हम बहुत साधारण परिवार से हैं तो कोई मुह उठाकर हमको देशद्रोही बोत दे रहा है.

अमित शाह भी चार्जशीटेड हैं, खून के आरोपी हैं. कोई उनको खूनी नहीं लिख रहा है. अमित शाह खूनी... किसी टीवी चैनल को ये हिम्मत नहीं है वो लिख दे कि अमित शाह खूनी.. लेकिन कन्हैया के खिलाफ अभी सिर्फ चार्जशीट ही हुआ है तो देश द्रोही वो साबित हो गया. 

हम ये कह रहे हैं कि चार्जशीट आया है. पुलिस इतने देर के बाद भी चार्जशीट की है तब भी हम उसको बधाई देते हैं. 

सारा जो पॉलिटिकल प्रेशर, चुनाव के ठीक पहले चार्जशीट हुआ है. ये सारी चीजों को हम छोड़ देते हैं. हम ये भी नहीं काउंट करते हैं कि 90 दिन के भीतर चार्जशीट होना था अब जब 90 दिन चुनाव का बचा है तब चार्जशीट हुआ है. हम ये भी नहीं बोल रहे हैं. 

हम सिर्फ ये बोल रहे हैं कि इतना देर होने के बावजूद यहां से भी पुलिस अपनी तत्परता दिखाए. अगर देश के खिलाफ कहीं कुछ बोला गया है तो पुलिस अपना सीरियसनेस दिखाए. सारे एविडेंस हैं वो कह रही है कि हम कलेक्ट कर लिए हैं. तो वो इस मामले में स्पीडी ट्रायल करे. दूध का दूध और पानी का पानी हो. जो भी गलत है उस गलत व्यक्ति को सज़ा दिया जाए. 

ये कॉन्फिडेंस हमको इसलिए है क्योंकि हम JNU में पढ़े हैं. हम जेएनयू को जानते हैं. JNU की वास्तविकता से हम वाकिफ हैं. 

चार्जशीट का जो डीटेल है वो हमारे पास नहीं आया है लेकिन मुख्य बात ये कहा जा रहा है कि इस कार्यक्रम की जानकारी आपको थी और आप मौजूद थे जब ये ऑब्जेक्शन लेवल स्लोगन लगाया गया.

अब यदि इस दोनों बात को सही मान लिया जाए. पहली बात तो ये कि हम परमिटिंग अथॉरिटी नहीं हैं. हम परमिशन नहीं देते हैं. हमारे परमिशन से कोई कार्यक्रम नहीं होता है. दूसरी बात कि हमारी मौजूदगी में नारेबाजी लगाई गई तब भी हमारे उपर सेडीशन का मामला नहीं बनता है. सेडीशन के अपने कानून हैं, अपना तरीका है. सुप्रीम कोर्ट का इसमें रूलिंग है. इत्तेफाक की बात ये है कि मेरा घर भी बेगूसराय है और सुप्रीम कोर्ट में जो डिसिजन दिया है सेडिशन के मामले में उस इंसान का घर भी बेगूसराय ही था.

इस पूरे के पूरे मामले में जो बेसिक फैक्ट है उस बेसिक फैक्ट को छिपाकर के प्रस्तुत किया जाता है. उसके पीछे एक पॉलिटिकल मोटिवेशन है. इस देश में एक ऐसा माहौल खड़ा किया जा रहा है, एक ऐसी फर्जी बहस खड़ी की जा रही है जिसमें जनता के असली सवाल गायब हो जाए.

हमारा काम ये है कि हम असली सवालों को, असली मुद्दों को जनता के बीच में लेकर आएं.''

बेगूसराय से चुनाव लड़ने की तैयारी में कन्हैया कुमार..

मीडिया ने जब कन्हैया कुमार से ये सावल पूछा कि आप चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. पूरे बेगूसराय में घूम रहे हैं. तो क्या आपको लगता है कि कहीं न कहीं चुनाव पर इसका इम्पैक्ट पड़ेगा. 

इस सवाल को सिरे से खारिज करते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि चुनाव पर इसका असर नहीं पड़ेगा. ये बेगूसराय है.. राष्ट्र कवि दिनकर की धरती है. उनको पता है कि इस मिट्टी से राष्ट्र कवि पैदा होते हैं.., राष्ट्र द्रोही पैदा नहीं होते हैं. उनको अपने नमक पर भरोसा है.

सूत्र ने कहा, "इस मामले में हमने कुछ छात्र नेताओं और जेएनयू के सुरक्षा गार्डों को गवाह बनाया है. हमने अपनी जांच में लगभग 30 लोगों को संदिग्ध पाया था, लेकिन हमारे पास उनके खिलाफ जांच बढ़ने के सबूत नहीं थे."

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