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फारूक अब्दुल्ला ने तोड़ी सारी हदें, J&K के राज्यपाल को बताया केंद्र का गुलाम

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

जम्मू कश्मीर की सियासत में चल रहे उतार चढ़ाव के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर विधानसभा को भंग करने को लेकर जोरदार हमला किया है. फारुक ने गवर्नर के फैसले पर कहा है कि सत्यपाल मलिक केंद्र सरकार के 'गुलाम' बन गए हैं. बुधवार शाम को पीडीपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने का ऐलान किया था. इसी सुगबुगाहट के बीच ही सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग करने का ऐलान कर दिया था.

फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'मुझे इन राज्यपाल से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन यह बहुत बुरा हुआ है. वो केंद्र सरकार के गुलाम बनकर रह गए हैं. गवर्नर के पद पर फिर से विचार किए जाने की जरूरत है. विधानसभा भंग करने के लिए उन्होंने 5 महीने इंतजार क्यों किया?'  

इस दौरान अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्ट के नेता राम माधव के बयान पर भी पलटवार किया. राम माधव की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा, 'पीडीपी जब तक बीजेपी के साथ गठबंधन में थी तब तक वह आतंकवाद फ्रेंडली नहीं थी. कांग्रेस और एनसी के साथ गठबंधन की बात करने पर वह आतंकवाद फ्रेंडली हो गई?' उन्होंने कहा कि माधव को न केवल जम्मू-कश्मीर के लोगों से बल्कि भारत के लोगों से माफ़ी मांगनी चाहिए. 

गौरतलब है कि राम माधव ने कथित तौर पर पीडीपी और एनसी के गठबंधन को 'पाकिस्तान प्रायोजित' करार दिया था. माधव ने बोला था, 'पीडीपी और एनसी ने पिछले महीने स्थानीय निकाय चुनाव का बहिष्कार इसलिए किया था क्योंकि उनको पास सीमा पार से निर्देश आए थे. मतलब इस बार भी उनको सरकार बनाने का निर्देश सीमा पार से ही आया होगा. इसीलिए उन्होंने इस पूरे प्रकरण क अंजाम दिया.'

इसके अलावा, अब्दुल्ला ने मांग की कि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को स्थिति का ध्यान रखना चाहिए और राज्यपाल को बर्खास्त करना चाहिए. उन्होंने कहा, 'राज्यपाल बीजेपी के हाथों का कठपुतली है और केंद्र सरकार के आदेश पर कार्य करता है. राष्ट्रपति को ध्यान रखना चाहिए और तुरंत उसे वापस बुलाना या बर्खास्त कर देना चाहिए."

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार की रात राज्य विधानसभा को भंग कर दिया था. जिसके कुछ देर पहले ही पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने गठबंधन कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था. इस गठबंधन में पीडीपी, एनसी और कांग्रेस शामिल थे. . इसके बावजूद कांग्रेस, पीडीपी और एनसी सरकार बनाने के लिए तैयार हैं और राज्यपाल के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है.

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