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INSIDE STORY: शिवसेना -एनसीपी - कांग्रेस गठबंधन के पीछे क्या असली किंगमेकर हैं प्रशांत किशोर?

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

महाराष्ट्र में नई सरकार का रास्ता आज साफ हो गया है। ऐसे में शिवसेना - एनसीपी - कांग्रेस गठबंधन के पर्दे के पीछे मास्टरमाइंड जदयू के राष्ट्रीय उप्धायक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को माना जा रहा हैं। अटकलें हैं कि सीएम नीतीश कुमार, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी को सत्ता तक पहुंचाने वाले प्रशांत किशोर ने उद्धव ठाकरे से किया गया वादा पूरा किया! ऐसे में सवाल उठता है कि क्या महाराष्ट्र में पिछले 29 दिनों से चल रहे महाभारत के पीछे मास्टर माइंड प्रशांत किशोर ही हैं?

अटकलें यह भी है कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे का सीएम बनने का खाका महज 2 दिनों में नहीं बल्कि इसी वर्ष फरवरी महीने में तय हो गया था। जब चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले महाराष्ट्र में शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मिलने उनके आवास मातोश्री पहुंचे थे। सूत्रों की माने तो उस बैठक में शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने प्रशांत किशोर का सबसे परिचय कराया था। इस दौरान किशोर ने शिवसेनिकों की हिदायत दी थी कि वह महाराष्ट्र के स्थानीय मुद्दों को बढ़ चढ़ कर उठाएं। साथ ही शिवसेना के प्रचार अभियान और मीडिया मैनजमेंट के लिए रणनीतिक मदद देने की बात कही। इस बैठक में शिवसेना ने यह तय कर लिया था कि पार्टी को अपना मुख्यमंत्री बनाने के लक्ष्य की दिशा में काम करेगी। इसके साथ ही महाराष्ट्र में शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे को नई उम्मीद के तौर पर पेश करने की जिम्मेदारी सौपीं। इसी वजह से आदित्य ठाकरे वर्ली सीट से चुनाव जीतने वाले ठाकरे परिवार के पहले सदस्य बन गए।

सूत्रों की माने तो उसी बैठक में प्रशांत किशोर ने शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनने का सपना दिखाया था, जिस कारण शिवसेना ने 50-50 फॉर्मूले के तहत ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री के पद की मांग रखी। इस मांग को बीजेपी ने नहीं । इस मुद्दे पर दोनों का करीब 25 साल पुराना गठबंधन टूट गया। बताया जाता है कि प्रशांत किशोर के इस कदम का बिहार की राजनीति पर भी असर पड़ना तय है।

इधऱ, बीजेपी महिला मोर्चा की नेता और सोशल मीडिया विंग की राष्ट्रीय प्रभारी प्रीती गांधी ने महाराष्‍ट्र में एनडीए की स्थिति के लिए प्रशांत किशोर को जिम्‍मेदार ठहराया है। अपने ट्वीट में उन्‍होंने लिखा है कि प्रशांत किशोर ले डूबे।


वहीं प्रशांत किशोर का नाम लिए बिना जेडीयू नेता अजय आलोक ने ट्वीट कर लिखा ''एक हैं मास्टर स्ट्रैटेजिस्ट पिछले कुछ दिनो से शिव सेना उनसे ज्ञान ले रही थी नतीजा सब देख रहे हैं -अब महामहिम ने और समय नहीं दिया लगता हैं इस पहलू पे मास्टर साहब ने ध्यान नहीं दिया होगा !!! नतीजा ना तीन में ना तेरह में ! कहते हैं ना गफ़लत में सब गए , माया मिली ना राम ।जय मातर साब''

याद दिला दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी अभियान से प्रशांत किशोर की पहचान जीत की गारंटी दिलाने वाले के तौर पर हुई। बीजेपी से मदभेद के बाद किशोर ने 2015 में जेडीयू का दामन थामा। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाई । सीएम नीतीश कुमार के जनसंपर्क अभियान 'हर-घर दस्तक' और 'बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है' जैसे लोकप्रिय नारे के पीछे भी किशोर ही थे। 

इसके बाद प्रशांत ने 2017 में विधानसभा चुनावो में कांग्रेस पार्टी के पंजबा और यूपी में चुनावी अभियान का कमान संभाला। उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह के कॉफी विद कैप्टन और राहुल गांधी की किसान यात्रा और खाट सभा की रूप रेखा तैयार की थी। इसी वजह से प्रशांत किशोर के रिश्ते कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी अच्छे हैं। और इसी का फायदा उन्हें महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को सीएम बनवाने में मिला। 

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