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"महज 8 साल की उम्र में RSS की मीटिंग का बना था हिस्सा, गुजरात बाढ़ के समय लगाएं थे फूड स्टॉल"

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

मानव जीवन के संघर्ष से जुड़ी कुछ अदभुद कहानियों को अक्सर अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जगह देने वाले "ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे" नामक पोर्टल अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प कहानियों को ​​​लेकर सामने आया है.

"मैं और अधिक करना चाहता था, लेकिन हमें पता था कि हमारे पास बहुत कम साधन हैं."

कुछ इस तरह पीएम मोदी ने अपनी बचपन से जुड़ी यादें को ताजा करते हुए कहा कि मैं एक बेहद विनम्र परिवार से ताल्लुक रखता था, जहां मेरे पिता चाय की दुकान चलाते थे और मां पारंपरिक रूप से लोगों का इलाज करने के लिए प्रसिद्ध थी." 

राजनीतिक जीवन के शुरूआती कदमों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बचपन से जुड़ा एक किस्सा साझा किया, जहां उनका एक ऐसी दुनिया का अनावरण हुआ, जिसने राजनीतिक दुनिया में उनके प्रवेश को बखूबी परिभाषित किया.

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 किताबें से था खासा लगाव

 पीएम मोदी ने कहा कि मैं लाइब्रेरी जाने के लिए हमेश उत्सुक रहता था और जो भी किताब मेरे हाथ लगती थी उसे पढ़ डालता था"

उन्होंने आगे कहा कि जब मैं आठ साल का था जब मैंने पहली बार आरएसएस की मीटिंग में हिस्सा लिया और जब मैं 9 साल का था तो मैं दूसरों के जीवन की बेहतरी के लिए एक प्रयास का हिस्सा बना -  दरअसल मैंने गुजरात के कुछ हिस्सों में बाढ़ के पीड़ितों की मदद के लिए अपने दोस्तों के साथ एक फूड स्टॉल लगाया. "

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

(1/5) “My family of 8 lived in a 40x12 feet house–it was small, but enough for us. Our days began at 5 AM when my mother would provide traditional forms of curing & healing to newborns & small children. All night, my brother & I would keep the ‘chula’ going for her to use. She didn’t have the fortune of getting an education, but God was kind & she had a special way of curing ailments. Mothers would line up outside our home because she was known for her healing touch. Then, I would open my father’s tea stall at the railway station, clean up & go to school. As soon as school ended, I would rush back to help him, but what I really looked forward to was meeting people from all over India. I would serve them tea & listen to their stories–that’s how I learnt to speak Hindi. I would hear some traders speak about ‘Bambai’ & wonder, ‘Will I ever get to see the city of dreams?’ I was always curious–I’d go to the library & read everything I could get my hands on. I was 8 when I attended my first RSS meeting & 9 when I was a part of an effort to better the lives of others–I set up a food stall with my friends to help the victims of floods in parts of Gujarat. I wanted to do more, but knew we had little means. Still, even at that age, I believed that God has made us all alike. It didn’t matter what circumstances I was born into, I could be something more. So when you ask me what my struggles were, I’ll tell you that I had none. I came from nothing, knew no luxury & hadn’t seen a ‘better’ life, so in my small world...I was happy. If the way was ever difficult, I made my own way. I had a great need to look sharp & groomed. So even though we couldn’t afford an iron, I would heat coal, use an old ‘lota’, wrap a cloth around it & press my clothes–the effect was the same, then why complain? This was the beginning of everything that I am today & I didn’t even know it at the time. So if you ask the 8 year old Narendra Modi, running around serving chai & cleaning his father’s tea stall, whether he even dared to dream about becoming the Prime Minister of India, his answer would be no. Never. It was too far to even think about.” #TheModiStory

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ज्यादा उत्साह के साथ काम करने की जिज्ञासा के साथ, पीएम मोदी ने अपने बचपन को साझा करते हुए कहा कि मैं और ज्यादा करना चाहता था लेकिन मुझे पता है कि हमारे पास बहुत कम साधन हैं. वहीं अपने इस खास इंटरव्यू में आरएसएस से जुड़ने के अलावा, पीएम मोदी ने अपने बचपन, मां , पिता की दुकान से जुड़े किस्सों को भी सामने रखा.
 
वहीं इंस्टाग्राम "ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे" के अधिकारिक अकाउंट से शेयर किए गए इस पोस्ट पर 20 हजार से ज्यादा लाइक आ चुके हैं और सैकड़ों लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दी हैं.
 

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