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महाराष्ट्र में मुश्किल में महागठबंधन, प्रकाश अंबेडकर के बाद अब सपा ने कांग्रेस को दिखाएं तेवर

Written By Dinesh Mourya | Mumbai | Published:

आम चुनाव अब बस कुछ ही महिने दूर हैं। पीएम मोदी को हराने के लिए कॉंग्रेस पार्टी पुरे देश में स्थानिय दलों के साथ गठबंधन करने की कोशीश कर रही हैं.  महाराष्ट्र की बात करें तो यहां कॉंग्रेस 8-10 स्थानिय पार्टीयों के साथ मिलकर महागठबंधन बनाने की कोशीश कर रही हैं . पिछले कुछ महिनों में कॉंग्रेस ने एनसीपी, बसपा, सपा, सीपीआई, राजू शेट्टी की पार्टी शेतकरी कामगार पक्ष, प्रकाश अंबेडकर सहित अन्य दलों के साथ गठबंधन के लिए बातचीत की। कॉंग्रेस पहले दावा कर रही थी की लगभग सभी दल उनके साथ आने को तैयार हैं लेकिन एक 24घंटें में बदले घटनाक्रम ने कॉंग्रेस को दावों को खोखला साबित कर दिया . 


रिपब्लिक टीवी से बातचीत में समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आझमी ने कहा कि, हमने गठबंधन को लेकर कॉंग्रेस से बातचीत की लेकिन उन्होने हमें सम्मान नहीं दिया। हमने सिर्फ एक सीट मांगी थी लेकिन वह वो भी देने को तैयार नहीं हैं. हमारी राज्य ईकायी की बैठक में सर्वसम्मती से फैसला लिया गया हैं कि, हम 10 सीटों पर अपने उम्मीदवार खडे करेंगें। बहुत जल्द हम अपना फैसला पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को बता देंगें। हमने कोशीश की लेकिन बात नहीं बनी ऐसे में अब कॉंग्रेस हमें वोट कटुआ नहीं कह सकती.


आझमी ने आगे कहा कि, अगर कॉंग्रेस हमें सम्मान देती हैं और हमारी मांगे पुरी करती हैं तो दुबारा हम अपने फैसले पर विचार करेंगें या फिर अकेले चुनाव में उतरेंगे। सिर्फ आझमी ही नहीं बल्कि संविधान निर्माता बाबासाहेब अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर की पार्टी भारीप बहुजन महासंघ ने भी कॉंग्रेस को अल्टीमेटम दे दिया हैं. प्रकाश अंबेडकर ने अपने बयान में कहा हैं कि, आज हम कॉंग्रेस को कहना चाहते हैं कि, आप जमात ए इस्लामी के महाराष्ट्र अध्यक्ष मौलाना सिद्दीकी को लिखित में सीटों के बंटवारे का प्रस्ताव दें, हम मौखीक आश्वासन को नहीं मानेंगे. अब चर्चा को निर्णय के रास्ते पर पहुंचना चाहिए . अगर हमें 30 जनवरी तक लिखीत में नहीं मिला तब हम अपनी मीटिंग बुलायेंगें और उसमें चर्चा करेंगे . हम अपना फैसला लेने के लिये स्वतंत्र हैं और हम उसी हिसाब के आगे बढेंगे.


भलेही प्रकाश अबंडेकर और समाजवादी का प्रभाव पुरे राज्य में ना हो लेकिन इन दोनो दलों का वचर्स्व उन इलाकों में जरुर हैं जहां दलित और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या बड़ी मात्रा में हैं जिसकी वजह से कुछ लोकसभा की सीटों पर कॉंग्रेस को इन दोनो दलों की वजह से जरुर नुकसान उठाना पड सकता हैं.

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