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रक्षा मंत्री ने एचएएल मामले पर संसद में झूठ बोला, दस्तावेज पेश करें या इस्तीफा दें : राहुल गांधी

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को एक लाख करोड़ रुपये का सरकारी ऑर्डर देने के मामले में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर संसद में झूठ बोलने का आरोप लगाया है . उन्होंने कहा कि सदन में अपने बयान के समर्थन में वह या तो दस्तावेज पेश करें या इस्तीफा दें .

गांधी ने सरकार पर निशाना तब साधा है जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ‘‘एचएएल के पास एक लाख करोड़ रुपये में से एक भी रुपया नहीं आया है . दावे के विपरीत अब तक एक भी ऑर्डर पर हस्ताक्षर नहीं किया गया है .’’ 

मीडिया रिपोर्ट में अपने दावे के समर्थन में एचएलएल प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी को उद्धृत किया गया है . 

मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनी एचएएल वित्तीय संकट से जूझ रही है और अपने कर्मियों को तनख्वाह देने के लिए धन उधार लेने को मजबूर है .

विपक्षी दल ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदे के तहत एचएएल को एक ऑफसेट अनुबंध से वंचित कर दिया . सरकार इन आरोपों को खारिज कर चुकी है .

उधर, भाजपा नीत एनडीए सरकार ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उसने अपने शासनकाल में एचएएल का समर्थन नहीं किया और सरकार अब रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम को मजबूत कर रही है .

गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘जब आप झूठ बोलते हैं, तो उसके समर्थन में आपको और झूठ बोलने पड़ते हैं . राफेल पर प्रधानमंत्री के झूठ का बचाव करने के लिए रक्षा मंत्री ने संसद में झूठ बोला .’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘कल रक्षामंत्री संसद में एचएएल को एक लाख करोड़ रुपये का ऑर्डर देने का दस्तावेज पेश करें या इस्तीफा दें .’’ 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने सूट-बूट वाले दोस्तों की मदद करने के लिए एचएएल को कमजोर किया है .

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने रविवार को ट्वीट किया, ‘‘झूठ बोलने वाली रक्षा मंत्री के झूठ का पर्दाफाश हो गया . रक्षा मंत्री ने दावा किया था कि एचएएल को एक लाख करोड़ रुपये की खरीद के ऑर्डर दिए गए हैं . एचएएल का कहना है कि उसे एक पैसा तक नहीं मिला क्योंकि एक भी ऑर्डर पर हस्ताक्षर नहीं किए गए .’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘पहली बार, एचएएल वेतन देने के लिए 1000 करोड़ रुपए का कर्ज लेने को मजबूर है .’’
 

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