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बिहार: लोकसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर RJD से माथापच्ची करेंगी कांग्रेस

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

लोकसभा चुनाव के लिए बिहार में महागठबंधन की पार्टियों के बीच सीटों के तालमेल पर हफ़्तों से चले आ रहे गतिरोध को दूर करने के लिए कांग्रेस फिर से राजद नेतृत्व के साथ बातचीत करेगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की 12 मार्च को प्रस्तावित कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद बातचीत होने की उम्मीद है। पार्टी को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों के भीतर ही सीट बंटवारे पर फैसला हो जाएगा।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ हफ़्तों में कई दौर की औपचारिक और अनौपचारिक बातचीत के बावजूद सीटों के तालमेल पर गतिरोध बना हुआ है।

राजद एवं महागठबंधन के दूसरे घटक दलों के साथ बातचीत की कवायद से अवगत कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ' अभी पार्टी के ज्यादातर नेता और खासकर बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल अहमदाबाद में हो रही सीडब्ल्यूसी की बैठक की तैयारियों में व्यस्त हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद हम फिर बातचीत करेंगे और हमें पूरी उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों के भीतर ही सीटों के बंटवारे पर निर्णय हो जाएगा।'

सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह में हुई बातचीत के दौरान कांग्रेस ने अपने लिए 14 सीटों पर जोर दिया, लेकिन कई नए सहयोगियों के साथ आने के कारण राजद उसकी इस मांग पर तैयार नहीं है।

वैसे, कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की जरूरत को देखते पिछले कुछ दिनों में अपने रुख को थोड़ा नरम किया है। पार्टी सूत्रों का यह कहना है कि अब कांग्रेस 10-12 सीटों पर भी तैयार हो सकती है।

इस बार कई और पार्टियां महागठबंधन में शामिल हैं जिस वजह से सीट बंटवारे का मसला और पेचीदा हो गया है।

महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी 'हम', मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी और शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल शामिल है। वाम दलों के भी महागठबंधन में शामिल होने के आसार हैं।

सीट बंटवारे को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच पिछले दिनों कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल, सह-प्रभारी वीरेंद्र राठौर, प्रदेश अध्यक्ष मदनमोहन झा तथा राज्य इकाई के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में गहन मंथन किया।

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेताओं ने महागठबंधन की जरूरत पर जोर देने के साथ ही उन सीटों पर चर्चा की जहां कांग्रेस अच्छी स्थिति में है और जिन्हें अपने पास रखा जा सकता है।

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