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अखिलेश यादव की मुश्किलों के बीच साथ आई कांग्रेस, केंद्र सरकार के खिलाफ उगला ज़हर

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

अवैध रेत खनन मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा के एक अन्य नेता को भी केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा तलब किए जाने की संभावना के बीच कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ खूब ज़हर उगला है. 

कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव का बचाव किया है. उन्होंने मोदी सरकार को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा है कि ये सरकार सीबीआई के द्वारा, इनकम टैक्स के द्वारा, ईडी के द्वारा डराने धमकाने की कोशिश कर रही है. 

गुलाम नबी आजाद का कहना है, ''एजेंसियों का किस तरह से इस्तेमाल करना है अपने विरोधी दलों को खत्म करने के लिए, कमजोर करने के लिए, उनपर आरोप लगाने के लिए. शुरुआत से लेकर आज तक कोई भी पॉलिटिकल पार्टी को पौने पांच सालों में इन्होंने नहीं छोड़ा. चाहें वो कांग्रेस पार्टी के नाता हों, पूर्व मुख्यमंत्री हों, चाहें वो RJD के लीडर्स हों, चाहें वो NCP के लीडर्स हों, चाहें वो TMC के लीडर्स हों, चाहें DMK, AIDMK के लोग हों. उन तमाम पॉलिटिकल, कश्मीर के राजनीतिक दलों पर भी उनपर इन्होंने सीबीआई के द्वारा, इनकम टैक्स के द्वारा, ईडी के द्वारा डराने धमकाने का पूरा प्रयास किया.''

उन्होंने कहा कि जब ये सरकार जा रही है और बैसाखियों पर खड़ी है तो जाते-जाते भूतपूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी पर कार्रवाई शुरू कर दी. दो दिन शनिवार-रविवार से इतना ही चल रहा है कि अब नहीं, कल नहीं किसी भी वक्त अखिलेश यादव पर सीबीआई कार्रवाई कर सकती है. उनसे पूछताछ कर सकती है. पौने पांच साल ये सरकार कहां बैठी थी. इतने साल इनको अखिलेश यादव की अगर कोई करप्शन हुई वो नज़र नहीं आई. लेकिन चुनाव हो रहा है और इलेक्शन में गठजोड़-गठबंधन कर के भारतीय जनता पार्टी के पराजय का कारण ना बनें इसलिए उनको इलेक्शन के वक्त डराओ धमकाओ ताकि वो गठबंधन ना करें. 

गुलाम नबी ने कहा, ''लोकतंत्र में गठबंधन करना या ना करना राजनीतिक दलों की अपनी मर्जी पर है. हमको हमारी पार्टी को कई दफा 1977 जब सबसे पहले पराजय हमारी पार्टी की हुई तो सभी दल एक हो गए. तो उस वक्त इंदिरा गांधी या किसी ने ये थोड़ी कह दिया कि तुम सब एक हो जाओगे तो सीबीआई पीछे लग जाएंगे. राजीव गांधी के समय में भी सभी दल इकट्ठे हो गए थे लेकिन उन्होंने किसी पर इनकम टैक्स या सीबीआई का रौब नहीं जमाया. हम इसकी पूरी निंदा करते हैं और इस तरह की राजनीति भारत में नहीं चलेगी.''

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बता दें, जानकारी के मुताबिक अखिलेश के अलावा सीबीआई द्वारा गायत्री प्रजापति से भी पूछताछ किए जाने की संभावना है. चित्रकूट निवासी एक महिला द्वारा बलात्कार का शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद प्रजापति को 2017 में गिरफ्तार किया गया था. अधिकारियों ने बताया कि अखिलेश के पास 2012 से जून 2013 के बीच खनन विभाग का अतिरिक्त प्रभार था.

ये आरोप है कि लोक सेवकों ने 2012 - 16 के दौरान अवैध खनन की इजाजत दी और खनन पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के प्रतिबंध के बावजूद लाइसेंसों का अवैध रूप से नवीनीकरण किया.  ये भी आरोप है कि अधिकारियों ने खनिजों की चोरी कराई, पट्टे लेने वालों और वाहन चालकों से धन की वसूली की.

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