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नसीरुद्दीन शाह के समर्थन में कांग्रेस नेता चव्हाण बोले, "डर के माहौल में जी रहे धर्मनिरपेक्ष लोग"

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भीड़ की हिंसा को लेकर फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के ताजा बयान का समर्थन करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण के लिए बीजेपी की कोशिशों से धर्मनिरपेक्ष लोग डर के माहौल में जी रहे हैं.

चव्हाण ने मीडिया से कहा, "अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की बातों में दम है और इन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए" पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "बुलंदशहर में भीड़ की हिंसा की घटना और पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों से स्पष्ट हो गया है कि भाजपा धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करना चाहती है. बीजेपी को अहसास हो गया है कि जनता से उसकी वादाखिलाफी उसे चुनावों में महंगी पड़ने वाली है." 

उन्होंने कहा, "भारत के धर्मनिरपेक्ष लोग डर के माहौल में जी रहे हैं. अगर आगामी लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी सरकार फिर से सत्ता में आ गई, तो हमें डर है कि देश में न तो संविधान बचेगा, न ही जनतंत्र."

गौरतलब है कि नसीरुद्दीन शाह ने बुलंदशहर में भीड़ की हिंसा में पुलिस निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह की मौत की ओर स्पष्ट इशारा करते हुए कहा है, "लोगों को कानून अपने हाथों में लेने की खुली छूट मिल गई है. कई इलाकों में हम देख रहे हैं कि एक पुलिस अफसर की मौत के बनिस्बत एक गाय की मौत को ज्यादा अहमियत दी जाती है.

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि कई जगहों पर एक गाय की मौत को एक पुलिस अधिकारी की हत्या से ज्यादा तवज्जो दी गई. अभिनेता ने अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को किसी खास धर्म की शिक्षा नहीं दी है.

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अभिनेता का कहना है कि ‘जहर फैलाया जा चुका है’ और अब इसे रोक पाना मुश्किल होगा.

उन्होंने कहा, ‘‘इस जिन्न को वापस बोतल में बंद करना मुश्किल होगा. जो कानून को अपने हाथों में ले रहे हैं, उन्हें खुली छूट दे दे गई है. कई क्षेत्रों में हम ये देख रहे हैं कि एक गाय की मौत को एक पुलिस अधिकारी से ज्यादा तवज्जो दी गई.'

अभिनेता की पत्नी रत्ना पाठक हैं. शाह ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चे इमाद और विवान को धार्मिक शिक्षा नहीं देना तय किया था क्योंकि उनका मानना है, 'खराब या अच्छा होने का किसी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है.' 
 

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