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जयराम रमेश का केंद्र सरकार पर बड़ा वार, बोले- इंदिरा कभी नोटबंदी जैसा ‘तुगलकी निर्णय’ नहीं लेतीं...

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि इंदिरा गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीच कोई तुलना नहीं हो सकती और इंदिरा नोटबंदी जैसा ‘तुगलकी निर्णय’ कभी नहीं लेतीं.

इंदिरा गांधी की जयंती के मौके पर रमेश ने ‘भाषा’ के साथ बातचीत में कहा, ‘‘ ‘‘कोई तुलना नहीं है. यह बात सही है कि 30 साल बाद किसी को स्पष्ट बहुमत मिला. लेकिन उस स्पष्ट बहुमत का क्या किया गया? सीबीआई, आरबीआई और दूसरी संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है. विश्वविद्यालयों में हस्तक्षेप किया जा रहा है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह बात सही है कि मोदी जी का भाजपा पर नियंत्रण है, वह सर्वज्ञानी हैं, लेकिन उनकी तुलना इंदिरा जी से नहीं की जा सकती क्योंकि इंदिरा जी अलग तरह की इंसान थीं. वह कभी नोटबंदी नहीं करती क्योंकि यह तुगलकी निर्णय था.’’ दरअसल, कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी के पर्यावरण एवं प्रकृति से जुड़े नजरिए पर लिखी गई रमेश की पुस्तक ‘इंदिरा गांधी: ए लाइफ इन नेचर’ के हिंदी संस्करण का सोमवार को विमोचन किया.

हिंदी संस्करण ‘इंदिरा गांधी: प्रकृति में एक जीवन’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है. 362 पृष्ठों की इस पुस्तक का प्रकाशन ‘ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस’ ने किया है


उनकी यह पुस्तक ‘इंदिरा गांधी: ए लाइफ इन नेचर’ का हिंदी संस्करण है जिसका विमोचन कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने किया. इस मौके पर रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और खुद को पर्यावरण संरक्षण के चैंपियन के तौर पर पेश करते हैं, लेकिन जब निर्णय लेने का वक्त आता है तो कुछ नहीं करते. गंगा तब तक निर्मल नहीं होगी जब तक अविरल गंगा नहीं होगी. अविरलता के बिना आप गंगा को साफ नहीं करते. अगर आप बांध बनाते जाएंगे औेर अब गडकरी जी जहाज चलाने में लगे हैं, तो ऐसे में मुझे नहीं लगता कि गंगा साफ होगी.’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘ इस सरकार ने पहले दिन से यह तय कर लिया था कि पर्यावरण से जुड़े नियमों-कानूनों को बदलना है. पर्यावरण मंत्रालय को कमजोर किया गया है, इंदिरा जी के समय बने वन संरक्षण कानून को कमजोर किया जा रहा है. वन का निजीकरण हो रहा है. तटवर्ती इलाकों के लिए तटीय नियमन क्षेत्र का कानून बना, लेकिन इसे भी कमजोर किया जा रहा है.’’

(इनपुट - भाषा)

 

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