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"दिल्ली से पूछता तो जम्मू कश्मीर में सज्जाद लोन के नेतृत्व में सरकार बनवानी पड़ती" - सत्यपाल मलिक

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

केंद्र के लिए असहज स्थिति पैदा करते हुए जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि अगर उन्होंने अपने हाल के फैसले के लिए दिल्ली से पूछा होता तो उन्हें सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली सरकार बनवानी पड़ती और इतिहास में उन्हें एक ‘बेईमान आदमी’ के रूप में याद किया जाता.

इस बीच, विपक्ष ने कहा है कि मलिक के दावे ने उनके इस आरोप को सही ठहरा दिया है कि वह ‘‘भाजपा समर्थित सरकार’’ बनाने के लिए दबाव में थे.

मलिक के इस दावे पर केन्द्र या भाजपा की फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन जम्मू स्थित राजभवन के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि राज्यपाल ने 21 नवंबर की रात को राज्य विधानसभा को भंग करने का फैसला ‘‘तटस्थ और निष्पक्ष तरीके से’’ लिया.

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘इस पूरे मामले में केन्द्र की तरफ से कोई दबाव या कोई हस्तक्षेप नहीं था.’’

लेकिन पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुखों क्रमश: महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली से ‘‘निर्देश’’ प्राप्त नहीं करके ‘‘भाजपा और इसके प्रतिनिधियों वाली’’ सरकार बनने से रोकने पर राज्यपाल की प्रशंसा की.

पीडीपी के नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद मलिक ने 21 नवंबर की रात को जम्मू कश्मीर विधानसभा अचानक भंग कर दी थी. इसके बाद लोन की अगुवाई वाली दो सदस्यीय पीपुल्स कांफ्रेस ने भी भाजपा और अन्य दलों के 18 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का प्रयास किया था.

ग्वालियर के आईटीएम विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में मलिक ने शनिवार को कहा, ‘‘दिल्ली की तरफ देखता तो मुझे लोन की सरकार बनवानी पड़ती और मैं इतिहास में एक बेईमान इंसान के तौर पर देखा जाता.’’

पत्रकार रवीश कुमार के अपने भाषण में जम्मू स्थित राज भवन में खराब फैक्स मशीन का जिक्र किये जाने के बाद मलिक ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘जो कोई भी दोष निकालना चाहता है, अब निकाल सकता है लेकिन मैं आश्वस्त हूं कि मैंने जो किया, वह सही था.’’

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि राज्यपाल विधानसभा भंग करने के अपने फैसले को सही ठहराने का जितना ज्यादा प्रयास करेंगे, वह उतना ही अपने जाल में फंसते चले जाएंगे.

तिवारी ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने ‘‘दिल्ली के निर्देशों पर ही’’ यह कदम उठाया है.

उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में संवाददाताओं से कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर में भारत के हितों को दीर्घावधि में नुकसान पहुंचाया है. यह वास्तविकता है जिसका दुर्भाग्य से भविष्य पर भी प्रभाव होगा.’’

कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राज्यपाल ने ‘‘खरीद फरोख्त और दबाव में गैरकानूनी सरकार बनाने के’’ मोदी सरकार के कथित ‘‘नापाक मंसूबों’’ का पर्दाफाश कर दिया.

अब्दुल्ला और महबूबा ने ट्विटर के जरिये राज्यपाल के दावे पर प्रतिक्रिया दी.

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘दिल्ली की तरफ नहीं देखने और उनसे निर्देश प्राप्त नहीं करके खरीद फरोख्त, दल बदल और धन बल के जरिये भाजपा तथा इसके प्रतिनिधियों की सरकार बनने से रोकने पर राज्यपाल मलिक की मैं सराहना करता हूं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं जानता कि ग्वालियर में राज्यपाल साहब के खुलासों का क्या मतलब निकाला जाए. हम जानते हैं कि भाजपा और इसके प्रतिनिधि खरीद फरोख्त और धन बल के जरिये सरकार बनाने के लिए उतावले थे लेकिन हमने भी यह कभी नहीं देखा कि राजनीतिक रूप से नियुक्त राज्यपाल केन्द्र की इच्छाओं के खिलाफ गये हों.’’

महबूबा ने कहा कि यह देखकर अच्छा लगा कि राज्यपाल ने ‘‘दिल्ली से निर्देश’’ लेने से इंकार कर दिया.

जम्मू कश्मीर कांग्रेस कमेटी के प्रमुख गुलाम अहमद मीर ने कहा कि मलिक की ‘‘स्वीकारोक्ति’’ ने विपक्ष के इस आरोप को सही ठहराया कि भाजपा चाहती थी कि राज्यपाल सभी संवैधानिक नियमों के खिलाफ जाकर दल-बदल के जरिये सरकार बनवाएं.

राज्यपाल ने ग्वालियर के कार्यक्रम में कहा कि दिल्ली से बिना किसी सलाह या निर्देश या चर्चा के, उन्होंने विधानसभा भंग करने का फैसला किया.
राज्यपाल ने कहा कि लोन कह रहे हैं कि उन्होंने व्हाट्सएप पर अपना पत्र मुझे भेजा था और मुफ्ती ने कहा कि उन्होंने सरकार बनाने का दावा ट्वीट करके पेश किया.

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह नहीं पता था कि सरकारें व्हाट्सएप और ट्वीट संदेश पर बनती हैं. सरकार बनाने का दावा व्हाट्सएप पर पेश नहीं होता है.’’


(इनपुट- भाषा)

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